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Mahashivratri 2026: इस मंदिर में शिव जी और माता पार्वती हुए थे एक, तीन युगों से जल रही विवाह की साक्षी अग्नि

Mahashivratri 2026: इस मंदिर में शिव जी और माता पार्वती हुए थे एक, तीन युगों से जल रही विवाह की साक्षी अग्नि
Mahashivratri 2026: इस मंदिर में शिव जी और माता पार्वती हुए थे एक, तीन युगों से जल रही विवाह की साक्षी अग्नि

इस मंदिर में हुआ था शिव जी और माता पार्वती का विवाह

Shiv Aur Mata Parvati Ka Vivah: देवों के देव महादेव ने माता पार्वती के साथ फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सात फेरे लिए थे. शिव जी और माता पार्वती के विवाह मेंदेवता, गंधर्व, भूत-प्रेत और नंदी आदि शामिल हुए थे. दोनों के विवाह के दिन को ही महाशिवरात्रि के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त व्रत व शिव जी और माता पार्वती की विशेष पूजा करते हैं.

मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती धरती लोक पर भ्रमण करते हैं और व्रत व पूजा करने वालों को विशेष आशीर्वाद देते हैं. महादेव और माता पार्वती के आशीर्वाद से जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं. जीवन में खुशियां आती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी और माता पार्वती का विवाह कहां हुआ था? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

शिव महापुराण के अनुसार…

शिव महापुराण के अनुसार, भगवान शिव और पार्वती का विवाह देवभूमि उत्तराखंड में हुआ था. जहां दोनों का विवाह हुआ, उस मंदिर को लोग आज त्रियुगीनारायण के नाम से जानते हैं. ये मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है. मान्यताओं के अनुसार, त्रियुगीनारायण मंदिर एक प्राचीन धार्मिक स्थल है. इसका पौराणिक कथाओं में जिक्र है.

लगभग 1980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर शांत पहाड़ियों, देवदार के वृक्षों से घिरा हुआ है. यहां का वातावरण बड़ा ही अलौकिक है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस जगह की लोकप्रियता डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी तेजी से बढ़ी है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित अखंड धुनी बताई जाती है. मंदिर के सामने बने हवन कुंड में यह दिव्य अग्नि कभी बुझती नहीं है.

त्रेतायुग से जल विवाह की साक्षी अग्नि

मान्यता के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की यह अग्नि साक्षी बनी थी. कहा जाता है कि हवन कुंड में यह दिव्य अग्नि त्रेतायुग से निरंतर जलती आ रही है. भक्त इस अग्नि में लकड़ियां डालते हैं. यही नहीं इस पवित्र अग्नि से प्राप्त राख को प्रसाद के रूप में खाते हैं. शिव-पार्वती विवाह में समस्त देवी-देवताओं की उपस्थित थे. ब्रह्मा जी ने विवाह कराया था. विष्णु जी ने माता पार्वती का कन्यादान किया था.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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