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Mahabharat katha: महाभारत के 17वें दिन श्रीकृष्ण फूट-फूटकर रोए, किसके मारे जाने की पीड़ा नहीं कर पाए सहन?

Mahabharat katha: महाभारत के 17वें दिन श्रीकृष्ण फूट-फूटकर रोए, किसके मारे जाने की पीड़ा नहीं कर पाए सहन?
Mahabharat katha: महाभारत के 17वें दिन श्रीकृष्ण फूट-फूटकर रोए, किसके मारे जाने की पीड़ा नहीं कर पाए सहन?

महाभारत कथाImage Credit source: AI

महाभारत का युद्ध केवल शस्त्रों का नहीं, बल्कि भावनाओं और धर्म का भी युद्ध था. कुरुक्षेत्र की भूमि पर 18 दिनों तक चले इस महासंग्राम में कई ऐसे पल आए जिसने इतिहास बदल दिया.लेकिन 17वां दिन सबसे अलग था. इसी दिन पांडवों के सबसे बड़े शत्रु, लेकिन कुंती के ज्येष्ठ पुत्र दानवीर कर्ण का अंत हुआ था. कहा जाता है कि कर्ण की मृत्यु के बाद खुद भगवान श्रीकृष्ण अपने आंसू नहीं रोक पाए थे. आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था जिसने भगवान श्रीकृष्ण को भी विलाप करने पर मजबूर कर दिया?

कर्ण का असीम त्याग और निष्ठा

जब अर्जुन के बाणों से कर्ण वीरगति को प्राप्त हुए, तब श्रीकृष्ण उनकी दानवीरता और उनके जीवन के संघर्षों को याद कर द्रवित हो उठे. कर्ण ने जानते हुए भी कि कौरवों की हार निश्चित है, अपने मित्र दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा.अपनी माता कुंती को दिए वचन और इंद्र को कवच-कुंडल दान करने जैसी उनकी महानता ने कृष्ण के हृदय को छू लिया था. कृष्ण जानते थे कि कर्ण वास्तव में पांडवों के बड़े भाई थे. एक ऐसा योद्धा जिसे जीवनभर सूतपुत्र कहकर अपमानित किया गया, वह आखिर तक अपनी मर्यादा में रहा. जब कृष्ण ने कर्ण का अंतिम संस्कार अपने हाथों पर किया जैसा कि कर्ण ने वरदान मांगा था, तब वे उसकी निष्ठा और अकेलेपन को याद कर भावुक हो गए.

भीषण नरसंहार की पीड़ा

17वें दिन तक कुरुक्षेत्र की भूमि लहूलुहान हो चुकी थी. भीष्म पितामह और गुरु द्रोण जैसे महारथी जा चुके थे. लाखों सैनिकों के शवों और विधवाओं के विलाप ने कृष्ण के भीतर की करुणा को जगा दिया. वे युद्ध की क्रूरता और मानवता के नुकसान को देखकर बहुत दुखी थे.

गांधारी का शाप और भविष्य का संकेत

युद्ध के आखिर की ओर बढ़ते देख कृष्ण को उस नियति का भी आभास था जो गांधारी के शाप के रूप में आने वाली थी.उन्हें पता था कि जिस तरह कुरुवंश का नाश हो रहा है, उसी तरह एक दिन उनके अपने यादव कुल का भी विनाश होगा.न्याय और धर्म की स्थापना के लिए उन्होंने जो भारी कीमत चुकाई थी, उसका बोझ उनके आंसुओं के रूप में छलक पड़ा.

क्या वाकई कृष्ण रोए थे?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण का रोना उनकी मानवीय लीला का हिस्सा था. वे दुनिया को यह बताना चाहते थे कि धर्म की विजय के लिए कई बार अपनों और नेक दिल इंसानों की बलि भी देनी पड़ती है, जो ईश्वर के लिए भी बहुत ही कष्टकारी होता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी मजानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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