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Mahabharat Katha: इस अप्सरा के श्राप के कारण अर्जुन को बनना पड़ा किन्नर, एक साल ऐसे ही काटा जीवन

Mahabharat Katha: इस अप्सरा के श्राप के कारण अर्जुन को बनना पड़ा किन्नर, एक साल ऐसे ही काटा जीवन
Mahabharat Katha: इस अप्सरा के श्राप के कारण अर्जुन को बनना पड़ा किन्नर, एक साल ऐसे ही काटा जीवन

अप्सरा उर्वशी ने दिया था अर्जुन को श्रापImage Credit source: AI ChatGpt

Urvashi Cursed Arjun In Mahabharat: महाभारत सिर्फ एक युद्ध भर की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें कई किरदार और कहानिया हैं. महाभारत के इन्हीं महत्वपूर्ण किरदारों में से एक हैं अर्जुन. महाभारत में अर्जुन की एक ऐसी कहानी है, जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. क्या आपको पता है कि अर्जुन जैसे वीर योद्धा को भी एक अप्सरा का दिया हुआ श्राप भोगना पड़ा था? इस श्राप किस वजह से अर्जुन किन्नर बन गए थे और एक साल किन्नर के रूप में ही बिताया था. अर्जुन के इस रूप का नाम बृहन्नला था. आइए इस श्राप की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं.

दरअसल, हुआ कुछ यूं कि अर्जुन और सभी पांडव वन में रहने के दौरान युद्ध की तैयारियों में भी जुटे थे. अर्जुन को युद्ध में जीतने के लिए दिव्यास्त्रों की आवश्यकता थी. इसके लिए उन्होंने भगवान इंद्र की अराधना की. इंद्र उनकी अराधना से प्रसन्न हुए और बदले में आशीर्वाद मांगने की बात कही. इस पर अर्जुन ने भगवान इंद्र से दिव्यास्त्र मांगे.

इंद्र देव ने अर्जुन को दिए दिव्यास्त्र

उस समय देव इंद्र ने अर्जुन को बताया कि इसके लिए पहले उन्हें महादेव को प्रसन्न करके पाशुपतास्त्र हासिल करना होगा. महादेव की कृपा से ही उनके लिए स्वर्ग के द्वार खुलेंगे, जहां उनको दिव्यास्त्रों की प्राप्ति होगी. इसके बाद अर्जुन ने तप करके महादेव को प्रसन्न किया और उनसे पाशुपतास्त्र हासिल किया और स्वर्ग गए, जहां इंद्र देव ने उनको सारे दिव्यास्त्र दिए.

हालांकि, स्वर्गलोक में अर्जुन के साथ एक असाधारण घटना घटी. स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी अर्जुन पर मोहित हो गईं और अपने प्रेम को स्वीकार करने का निवेदन किया. वो चांहती थीं कि अर्जुन उनके प्रेम का निवेदन स्वीकार कर लें, लेकिन अर्जुन ने मना कर दिया. इससे उर्वशी को बहुत क्रोध आ गया. वो क्रोध में अपने आपे से बाहर हो गईं और अर्जुन को नपुंसक हो जाने का श्राप दे दिया.

किन्नर के रूप में बृहन्नला बने अर्जुन

श्राप मिलने के बाद अर्जुन अचंभित रह गए और सोचने लगे कि अब क्या होगा. इसके बाद उन्होंने इंद्र देव से इस श्राप का निदान पूछा. श्राप का निदान जानने के बाद अर्जुन दिव्यास्त्र लेकर धरती पर लौट गए. इसके बाद वो एक साल अज्ञातवास के दौरान किन्नर बृहन्नला के रूप में मत्स्य देश में रहे और वहां विराट नरेश की पुत्री उत्तरा को नृत्य सिखाया. इस दौरन सभी पांडव और द्रोपदी भी भिन्न-भिन्न नामों से वहां रहे.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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