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समग्र शिक्षा का नया अवतार… जानें एजुकेशन मॉडल पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा प्लान

समग्र शिक्षा का नया अवतार… जानें एजुकेशन मॉडल पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा प्लान
समग्र शिक्षा का नया अवतार... जानें एजुकेशन मॉडल पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा प्लान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के साथ ‘समग्र शिक्षा’ को नया रूप देने के लिए परामर्श बैठक की सह-अध्यक्षता की. बैठक को लेकर उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, एकेडमिक एक्सपर्ट्स, सेक्टोरल मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा मंत्रालय और भाग लेने वाले 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की उत्साही भागीदारी और बहुमूल्य सुझावों की सराहना करता हूं. आज का यह प्रयास और इस मंच पर अग्रणी विचार हमारे स्कूल शिक्षा इकोसिस्टम को समग्र रूप से मजबूत करने, उन्हें विकसित भारत के लक्ष्य के साथ जोड़ने और समग्र शिक्षा योजना को फिर से सोचने के लिए एक साफ रोडमैप तैयार करने का रास्ता तय करेंगे. ताकि एक ऐसा एजुकेशन इकोसिस्टम बनाया जा सके जो आउटकम ओरिएंटेड, ग्लोबल कंपटीटिव, भारतीयता में निहित हो और जो हमारे छात्रों की तमाम जरूरतों को पूरा करे.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हम सभी के लिए 2047 तक विकसित भारत का एक विजन बताया है. यह विजन तभी हकीकत में बदलेगा जब भारत में हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी. हम कक्षा-12 तक स्कूल शिक्षा में 100% नामांकन हासिल करेंगे. उन्होंने कहा, ड्रॉप-आउट कम करना, सीखने के परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, हर बच्चे में डिजाइन थिंकिंग और महत्वपूर्ण कौशल को बढ़ावा देना, हमारी ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से बाहर निकालना और विकसित भारत के लिए मानव पूंजी का पोषण करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है.

हमारा ध्यान समानता हासिल करने से आगे होना चाहिए

उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान केवल गुणवत्ता और समानता हासिल करने से आगे भी होना चाहिए. हमें समग्र शिक्षा को एक व्यापक पहुंच योजना से बदलकर एक परिणाम-संचालित, गुणवत्ता-केंद्रित ढांचे में बदलना होगा जो NEP-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप हो. मैं सभी एकेडमिक एक्सपर्ट्स, सेक्टोरल मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षा मंत्रालय और भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कहना चाहता हूं कि वो शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए एक समग्र वार्षिक योजना बनाएं.

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, यह एक राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए. जब हमारे ‘कॉन्सेप्ट’ ‘कन्वर्ज’ होंगे तो हमारी ‘क्षमता’ को भी बढ़ावा मिलेगा. हमें स्कूलों को समाज को लौटाना होगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के 5 साल के बाद साल 2026-27 में हम ‘समग्र शिक्षा’ के एक नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं. आज हमारे सामने ‘विकसित भारत’ के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था और मानव बल तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती है. देश की एक बड़ी आबादी समग्र शिक्षा से अपेक्षा रखता है.

संचालन का दायित्व समाज का हो

उन्होंने कहा कि शिक्षा से एक न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा में सभी राज्यों के पास अपने-अपने अनुभव हैं. व्यवस्था और तनख्वाह सरकार का दायित्व हो लेकिन संचालन का दायित्व समाज का हो. इसका रास्ता कैसे निकलेगा, आज जब हम समग्र शिक्षा के नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं, तो हमे यह भी सोचना होगा.

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