पहले मुंबई और फिर दिल्ली हो रही तेज बारिश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ महीने पहले तक मौसम वैज्ञानिक अलनीनो के असर को लेकर चिंता जता रहे थे. भारतीय मौसम विभाग ने भी सामान्य से कम बारिश और कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका व्यक्त की थी. लेकिन महाराष्ट्र के कई हिस्सों भारी बारिश दिल्लीNCR में झमाझम बारिश देखने को मिल रही है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अल नीनो का असर खत्म हो गया? क्या मौसम विभाग की भविष्यवाणी गलत साबित हुई? आइए, समझते हैं विस्तार से.
अल नीनो क्या होता है?
अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है. इसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में आमतौर पर अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ सकता है. बारिश कम हो सकती है. खेती और जल स्रोतों पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, हर बार इसका असर एक जैसा नहीं होता. कई दूसरे मौसमीय कारक भी मानसून को प्रभावित करते हैं.
बारिश के बाद दिल्ली का हाल. फोटो: PTI
मौसम विभाग ने क्या कहा था?
भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही साफ किया था कि अल नीनो मानसून को प्रभावित कर सकता है. साथ ही यह भी कहा गया था कि पूरे देश में एक जैसी स्थिति नहीं होगी. कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर कम बारिश दर्ज हो सकती है. मौसम विभाग की भविष्यवाणी पूरे देश के औसत मानसून को ध्यान में रखकर की जाती है. इसका मतलब यह नहीं होता कि हर शहर या हर जिले में मौसम एक जैसा रहेगा.
बारिश के बाद गुरुग्राम का जाम. फोटो: PTI
दिल्लीNCR की बारिश ने खड़े किए सवाल?
पिछले दो दिनों से दिल्लीएनसीआर में हो रही बारिश ने गर्मी से राहत देने के साथसाथ मौसम विभाग के शुरुआती सूखे वाले अनुमानों पर सवाल खड़े किए हैं. राष्ट्रीय राजधानी में मानसून के इस सक्रिय स्वरूप और झमाझम बारिश ने न केवल जलभराव की समस्या खड़ी की है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि अल नीनो के साये के बावजूद स्थानीय मौसमी प्रणालियां जैसे कि लो प्रेशर एरिया और मानसूनी हवाओं की नमी दिल्लीएनसीआर में भी अपना पूरा असर दिखा रही हैं.
यहां आगामी 24 घंटे में 180 से 250 मिली मीटर बारिश का अनुमान है. मुंबई की तरह दिल्ली की यह बारिश भी इस बात की पुष्टि करती है कि मानसून एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसमें किसी बड़े वैश्विक कारक की तुलना में तात्कालिक वायुमंडलीय बदलाव कई बार अधिक प्रभावी साबित होते हैं.
नवी मुंबई में कारें डूबीं. फाेटो: PTI
मुंबई में इतनी बारिश क्यों हुई?
मुंबई की बारिश केवल अल नीनो से तय नहीं होती. इसके पीछे कई स्थानीय और क्षेत्रीय कारण भी होते हैं. इनमें अरब सागर से आने वाली नमी, कम दबाव का क्षेत्र बनना, मानसूनी हवाओं की मजबूती, पश्चिमी घाट का भौगोलिक प्रभाव और समुद्री तापमान में बदलाव जैसे प्रमुख कारण हैं. जब ये सभी स्थितियां एक साथ बनती हैं तो मुंबई में बहुत कम समय में भारी बारिश हो सकती है. इसलिए किसी एक शहर की बारिश से पूरे देश के मानसून का आकलन नहीं किया जा सकता.
महाराष्ट्र के कई जिलों में बारिश के बाद जलभराव नजर आया. फोटो: PTI
क्या अल नीनो का असर खत्म हो गया?
इस सवाल का स्पष्ट जवाब हैनहीं. अगर किसी क्षेत्र में अच्छी बारिश हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि अल नीनो पूरी तरह बेअसर हो गया. अल नीनो का प्रभाव पूरे मौसम के दौरान अलगअलग समय और अलगअलग क्षेत्रों में बदल सकता है. कई बार अल नीनो के बावजूद कुछ राज्यों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो जाती है. वहीं दूसरे क्षेत्रों में बारिश कम रह जाती है. यही वजह है कि वैज्ञानिक केवल एक शहर के आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालते.
दिल्ली में 24 घंटे में 180 से 250 मिली मीटर बारिश का अनुमान है. फोटो: PTI
क्या मौसम विभाग की भविष्यवाणी गलत थी?
ऐसा कहना भी सही नहीं होगा. मौसम विभाग संभावनाओं के आधार पर पूर्वानुमान जारी करता है. मौसम का पूर्वानुमान भविष्य की निश्चित घोषणा नहीं होता. यह उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों, समुद्री तापमान, हवा की दिशा और कई जलवायु संकेतकों के आधार पर तैयार किया जाता है. अगर किसी इलाके में अनुमान से अधिक बारिश हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि पूरी भविष्यवाणी गलत थी. मौसम विज्ञान में कई बार स्थानीय परिस्थितियां बड़े पैमाने की जलवायु घटनाओं का असर कम या ज्यादा कर देती हैं.
मौसम का अनुमान क्यों बदल जाता है?
मौसम एक बेहद जटिल प्रणाली है. इसमें कई कारक एक साथ काम करते हैं. समुद्र का तापमान, हवा की दिशा और गति, कम और अधिक दबाव वाले क्षेत्र, हिंद महासागर की स्थिति, मानसूनी ट्रफ की स्थिति, पश्चिमी विक्षोभ आदि कुछ महत्वपूर्ण कारक एक साथ काम करते हैं. इन सभी कारणों से मौसम में अचानक बदलाव आ सकता है. यही वजह है कि मौसम विभाग समयसमय पर अपने पूर्वानुमान अपडेट भी करता रहता है.
मौसम विभाग समयसमय पर अपने पूर्वानुमान अपडेट भी करता रहता है. फोटो: PTI
क्या केवल अल नीनो ही मानसून तय करता है?
भारतीय मानसून कई वैश्विक और स्थानीय मौसमीय प्रणालियों से प्रभावित होता है. इनमें हिंद महासागर का तापमान, अरब सागर की नमी, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र और मानसूनी हवाओं की ताकत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कई बार ये कारक अल नीनो के प्रभाव को कमजोर कर देते हैं. इसलिए अच्छी बारिश होना असंभव नहीं माना जाता.
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर किसी क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है तो किसानों को राहत मिलती है. जलाशयों में पानी बढ़ता है. सिंचाई की स्थिति बेहतर होती है. खरीफ फसलों को फायदा मिलता है. लेकिन पूरे देश की खेती का आकलन केवल मुंबई की बारिश से नहीं किया जा सकता. जिन इलाकों में बारिश कम होती है, वहां किसानों को अब भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए कृषि से जुड़े फैसले स्थानीय मौसम और वर्षा के आंकड़ों को देखकर ही लिए जाने चाहिए.
जलवायु परिवर्तन की क्या है भूमिका?
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो गया है. कई बार बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है. वहीं लंबे समय तक सूखा भी देखने को मिलता है. यानी एक ही मौसम में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, इसलिए केवल एक घटना के आधार पर पूरे मौसम का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
VIDEO | Ghaziabad: Heavy rain lashes parts of DelhiNCR causing waterlogging in several areas. Visuals from Indirapuram.#IndirapuramNews #Monsoon
— Press Trust of India July 9, 2026
हमें क्या समझना चाहिए?
मुंबई की भारी बारिश यह जरूर दिखाती है कि मौसम कई बार उम्मीद से अलग व्यवहार कर सकता है. लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि अल नीनो का असर पूरी तरह खत्म हो गया या मौसम विभाग की सभी भविष्यवाणियां गलत थीं. मौसम विभाग का काम संभावित स्थिति बताना है. वास्तविक मौसम कई प्राकृतिक कारणों के कारण बदल सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लगातार नए आंकड़ों के आधार पर अपने पूर्वानुमान में सुधार करते रहते हैं.
यह भी जानें
- मुंबई के कोलाबा वेधशाला में एक से सात जुलाई के बीच 791 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई.
- यह पूरे जुलाई महीने के औसत 768.5 मिली मीटर से कहीं ज्यादा है.
- मुंबई के ही एक और इलाके सांताक्रूज में लगभग 879 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई.
- दीर्घकालिक रुझान भी बारिश बढ़ने के संकेत दे रहे हैं.
- इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अलनीनो का असर खत्म हो गया है.
- अलनीनो में कहीं अतिशय बारिश तो कहीं अतिशय सूखा जैसी स्थिति आती है.
- देश में अभी मानसून आया ही है, कुछ दिन के बारिश के आधार पर कुछ भी कहना उचित नहीं है.




