
कुल्लू । हिमाचल की पारंपरिक हस्तकला को राष्ट्रीय मंच पर खास पहचान मिली, जब मंडी की सांसद कंगना रनौत हस्तनिर्मित शुद्ध ऊनी हिमाचली कोट पहनकर संसद पहुंचीं। देसी ऊन और प्राकृतिक रंगों से तैयार यह कोट कुल्लू की महिला कारीगरों ने हथकरघे पर दो महीनों में बुना है। यह परिधान हिमाचल की समृद्ध वस्त्र परंपरा को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत करता है। पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीक से बना यह कोट हिमालय की गर्माहट, रंगों और संस्कृति की झलक देता है।
दो महिला कारीगरों ने 60 दिनों में किया तैयार
यह खास कोट Kullvi Whims संस्था की दो महिला कारीगरों ने तैयार किया। संस्था के संस्थापक भृगु राज आचार्य और निशा सुब्रमण्यम के अनुसार, इस कोट को बनाने में लगभग दो महीने का समय लगा। परिधान में शुद्ध ऊन और वेजिटेबल (प्राकृतिक) रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाता है।
कीमत 16 हजार से 45 हजार रुपये तक
कंगना रनौत इससे पहले 2025 में कुल्लवी व्हिम्स के स्टूडियो भी गई थीं, जहां उन्होंने चार कोट और एक ‘पट्टू’ (पारंपरिक ऊनी परिधान) खरीदा था। संस्था के अनुसार, इन कोटों की कीमत 16 हजार रुपये से शुरू होकर 45 हजार रुपये तक जाती है। संसद जैसे राष्ट्रीय मंच पर इस तरह के हस्तनिर्मित परिधान का पहना जाना महिला कारीगरों के लिए विशेष सम्मान माना जा रहा है।
2014 में हुई थी शुरुआत, आज 400 महिलाएं जुड़ीं
भृगु राज आचार्य के मुताबिक, कुल्लवी व्हिम्स की शुरुआत 2014 में केवल छह महिला कारीगरों के साथ हुई थी। आज इस संस्था से करीब 400 महिलाएं जुड़ी हैं। इन हस्तनिर्मित ऊनी परिधानों की मांग अमेरिका, यूके, जापान और ऑस्ट्रेलिया तक है। संस्था हिमाचल की स्वदेशी ऊन परंपराओं के पुनरुद्धार और महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार देने के उद्देश्य से काम कर रही है। हिमाचली शिल्प और महिला सशक्तिकरण का यह उदाहरण राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।






