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Budget 2026: गामी बजट 2026 से हर वर्ग को कुछ न कुछ उम्मीदें हैं, लेकिन अगर आप किराये के मकान में रहते हैं या अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. रियल एस्टेट सेक्टर की सर्वोच्च संस्था क्रेडाई (CREDAI) ने वित्त मंत्रालय के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो अगर मान लिया गया, तो शहरों में रहने वाले मध्यम वर्ग की बड़ी मुश्किलें आसान हो सकती हैं. क्रेडाई ने सरकार से ‘नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन’ शुरू करने की जोरदार मांग की है, जिसका सीधा असर आपकी जेब और जीवनशैली पर पड़ने वाला है.
क्या है नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन?
देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण शहरों में प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में रहने के लिए व्यवस्थित किराये के घर मौजूद नहीं हैं. इसी कमी को दूर करने के लिए क्रेडाई ने बजट में एक ‘राष्ट्रीय रेंटल हाउसिंग मिशन’ की मांग की है. संगठन का कहना है कि सरकार को डेवलपर्स और किरायेदारों, दोनों को टैक्स में छूट देनी चाहिए.
क्रेडाई का तर्क है कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में बड़े पैमाने पर अफोर्डेबल रेंटल स्टॉक (किराये के सस्ते घर) तैयार करने की जरूरत है. अगर डेवलपर्स को वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा और किरायेदारों को टैक्स में राहत दी जाएगी, तो बाजार में संगठित रूप से किराये के घरों की उपलब्धता बढ़ेगी. इससे न केवल अवैध बस्तियों पर रोक लगेगी, बल्कि काम के सिलसिले में शहर बदलने वाले लोगों (वर्कफोर्स) को भी आसानी से सिर छिपाने की छत मिल सकेगी. क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने भी जोर देकर कहा है कि किफायती घरों तक पहुंच बढ़ाना और एक मजबूत रेंटल इकोसिस्टम बनाना अब वक्त की मांग है.
बदलेगी सस्ते घर की परिभाषा
घर खरीदना आम आदमी के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता है, लेकिन जमीन और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने इसे काफी मुश्किल बना दिया है. क्रेडाई ने सरकार का ध्यान इस ओर खींचा है कि ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ यानी किफायती घरों की जो परिभाषा 2017 में तय की गई थी, वह आज के समय में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, 45 लाख रुपये तक की कीमत और मेट्रो शहरों में 60 वर्ग मीटर (नॉन-मेट्रो में 90 वर्ग मीटर) के घर ही ‘अफोर्डेबल’ श्रेणी में आते हैं.
आज के दौर में मेट्रो शहरों में 45 लाख रुपये में ढंग का घर मिलना लगभग नामुमकिन है. इसलिए, क्रेडाई ने मांग की है कि इस 45 लाख रुपये की सीमा (Cap) को पूरी तरह हटा दिया जाए. साथ ही, मेट्रो शहरों में कारपेट एरिया की सीमा बढ़ाकर 90 वर्ग मीटर और नॉन-मेट्रो शहरों में 120 वर्ग मीटर करने का प्रस्ताव दिया गया है. अगर यह मांग मानी जाती है, तो बड़े घर भी किफायती श्रेणी में आ सकेंगे और उन पर खरीदारों को कम जीएसटी (जो अभी 1% है) और अन्य लाभ मिल सकेंगे. इसके अलावा, होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को मौजूदा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की सिफारिश भी की गई है, जो घर खरीदारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.






