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सजा-ए मौत में फांसी देना दर्दनाक तो फिर कैसे मारा जाए? सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

सजा-ए मौत में फांसी देना दर्दनाक तो फिर कैसे मारा जाए? सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस
सजा-ए मौत में फांसी देना दर्दनाक तो फिर कैसे मारा जाए? सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

मौत की सजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला

फांसी की जगह सजा-ए-मौत देने के लिए दूसरा बढ़िया विकल्प क्या हो सकता है? मामला सुप्रीम कोर्ट में है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने आज गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें मौत की सजा पाए दोषियों को वैकल्पिक तरीके से सजा देने की मांग की गई.

कोर्ट में दाखिल कई याचिकाओं के जरिए यह तर्क दिया गया कि फांसी देना मौत की सजा को अंजाम देने का एक बहुत ही दर्दनाक तरीका है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल को तीन हफ्ते के भीतर अपने लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है.

केंद्र सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में कहा कि मौत की सजा देने की फांसी एक बेहतर विधि है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी पूछा कि अगर फांसी बेहतर विधि नहीं है तो फिर कौन सी विधि लागू की जा सकती है.

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