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Hindu Dharma: अगर पिता है जीवित, तो पुत्र को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये काम

Hindu Dharma: अगर पिता है जीवित, तो पुत्र को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये काम
Hindu Dharma: अगर पिता है जीवित, तो पुत्र को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये काम

पिता के रहते पुत्र को नहीं करने चाहिए ये कामImage Credit source: Freepik

Hindu Dharma: मां के चरणों में अगर स्वर्ग बताया गया है, तो पिता को उस स्वर्ग की सीढ़ी माना गया है. हिंदू परिवार में पिता का स्थान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. पिता और पुत्र का संबंध बहुत पवित्र माना गया है. विशेषकर ये आवश्यक माना गया है कि एक पुत्र अपने पिता का सम्मान और समाजिक व्यवस्था बनाए रखे. शास्त्रों में जीवन के हर पहलू के लिए कुछ निमय बताए गए हैं.

मनु स्मृति और गरुड़ पुराण जैसे धर्मग्रंथों में साफ तौर पर कुछ ऐसे काम बताए गए हैं, जिनको एक पुत्र को पिता के जीवित रहते हुए नहीं करना चाहिए. ये सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी उचित है. ऐसे में आइए शास्त्रों के अनुसार, उन कामों के बारे में जानते हैं, जिनको पिता के जीवित रहते हुए पुत्र को करने से मना किया गया है.

पिता के जीवित रहते पुत्र न करे ये काम

पिता की जगह न ले

घर का मुखिया पिता को ही माना जाता है, इसलिए घर में यज्ञ, पूजा आदि का मुख्य कर्म पिता द्वारा ही किया जाता है. पुत्र को पिता के रहते इन कामों में नेतृत्व नहीं करना चाहिए. ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से गलत माना जाता है. साथ ही ये परिवार की व्यवस्था में भी अव्यवस्था उत्पन्न कर सकता है.

मूंछ न कटवाए

पुराने समय मूंछ पिता और पुत्र के बीच सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी. यही कारण है कि पुराने समय में पुत्र पिता के निधन से पहले कभी भी अपने जीवन काल में मूंछ नहीं कटवाता था. इसलिए पिता के निधन से पहले मूंछ कटवाने के लिए मना किया जाता है.

अपने नाम से दान न करे

पिता के रहते अगर कोई पुत्र दान करता है, तो उसको अपने पिता के नाम पर करना चाहिए. पिता के रहते स्वयं के नाम पर दान करना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है, इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए.

कार्यक्रम में नाम आगे नहीं लिखवाए

पिता के रहते पुत्र को किसी भी अवसर या कार्यक्रम में अपना नाम आगे नहीं लिखवाना चाहिए. पुत्र को सबसे पहले पिता और फिर अपना लिखवाना चाहिए. इससे परिवार में सामंजस्य बना रहता है और परंपरा का पालन होता है.

पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान न करे

पिता के रहते पुत्र को पूर्वजों का तर्पण या पिंडदान स्वयं नहीं करना चाहिए. इस काम का पहला अधिकार पिता के पास होता है. पुत्र के ऐसा कर देने पर परंपरा और समाज के नियमों का उल्लंघन होता है. यहीं नहीं शास्त्रों में भी इसे सही नहीं माना गया है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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