
गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ
सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में तेजी देखने को मिली. इसकी वजह कीमती धातुओं में आई तेज रिकवरी है, जबकि पिछले कुछ दिनों में इनमें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. अप्रैल एक्सपायरी वाले सोने के वायदा भाव सोमवार सुबह के ट्रेड में करीब 2% बढ़कर 10 ग्राम के लिए 1,58,500 रुपये पर पहुंच गए. जून एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में भी लगभग 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इस बीच, मार्च एक्सपायरी वाले चांदी के वायदा दाम करीब 6% बढ़कर 2,64,885 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए. वहीं, मई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में करीब 4% की तेजी देखी गई.
सोना-चांदी ETF में तेजी
UTI सिल्वर ETF 11% से ज्यादा उछलकर 252.08 रुपये प्रति यूनिट पर पहुंच गया, जबकि निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF 10% से ज्यादा बढ़कर 247 रुपये प्रति यूनिट हो गया. HDFC सिल्वर ETF, टाटा सिल्वर ETF समेत अन्य सिल्वर ETF में भी 10% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. जेरोधा सिल्वर ETF, SBI सिल्वर ETF, आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF, DSP सिल्वर ETF, कोटक सिल्वर ETF, ग्रोव सिल्वर ETF और ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF में करीब 8% की तेजी आई.
वहीं, मिराए एसेट सिल्वर ETF, 360 ONE सिल्वर ETF, एक्सिस सिल्वर ETF, मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF और अन्य ETF सुबह 9:30 बजे तक करीब 7% चढ़े रहे. सोने के ETF की बात करें तो यूनियन गोल्ड ETF और एंजेल वन गोल्ड ETF में 3% से ज़्यादा की तेजी देखी गई. वहीं, 360 ONE गोल्ड ETF, LIC MF गोल्ड ETF, कोटक गोल्ड ETF, मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ETF, निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF और SBI गोल्ड ETF में करीब 3% की बढ़त रही. जेरोधा गोल्ड ETF, HDFC गोल्ड ETF, एक्सिस म्यूचुअल फंड गोल्ड ETF, UTI MF गोल्ड ETF और अन्य गोल्ड ETF में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई.
कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव क्यों दिख रहा है?
हाल के दिनों में सोने और चांदी के बाजार में आया तेज उतार-चढ़ाव जनवरी में हुई रिकॉर्ड कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर चुका है. यह गिरावट तब शुरू हुई जब CME ग्रुप ने दोनों धातुओं पर मार्जिन की जरूरत बढ़ा दी. इसके चलते ज्यादा उधार लेकर ट्रेड करने वाले निवेशकों को अपनी पोजीशन बंद करनी पड़ी और बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली.
इसके अलावा, बिकवाली तब और तेज हो गई जब बाजार को यह संकेत मिला कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में नॉमिनेट किया है. उन्हें एक सख्त पॉलिसी अपनाने वाला और डॉलर के पक्ष में रहने वाला व्यक्ति माना जाता है. इससे ब्याज दरें सख्त रहने की उम्मीद बढ़ी और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जो आमतौर पर सोने-चांदी के लिए नुकसानदेह होता है.
यह भी पढ़ें- Gold-Silver Price- मार्केट में रैली के बीच बढ़ गए सोने-चांदी के दाम, इतने महंगे हुए गोल्ड-सिल्वर






