
सांकेतिक तस्वीरImage Credit source: Meta AI
CBSE Board Exam: सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं जैसे-जैसे करीब आती हैं, छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगती है. सिलेबस पूरा करना, सैंपल पेपर हल करना और रिवीजन प्लान बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है, लेकिन एक अहम सवाल पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता, अगर परीक्षा के दिन छात्र बीमार हो जाए या किसी आपात स्थिति के कारण परीक्षा में शामिल न हो पाए तो क्या होगा? कई लोग मानते हैं कि मेडिकल सर्टिफिकेट देने पर दोबारा परीक्षा का मौका मिल सकता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है. सीबीएसई की परीक्षा नीति इस मामले में काफी सख्त और स्पष्ट है.
परीक्षा के दिन अनुपस्थित रहने पर क्या नियम हैं?
सीबीएसई कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अलग से पुनर्परीक्षा आयोजित नहीं करता. अगर कोई छात्र बीमारी, पारिवारिक कारण या अन्य व्यक्तिगत वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता, तो उसके लिए मेक-अप एग्जाम का प्रावधान नहीं है. मेडिकल सर्टिफिकेट होने पर भी नियम में बदलाव नहीं होता.
बीमार होकर भी परीक्षा देने पहुंचे तो क्या होगा?
अगर छात्र अस्वस्थ होने के बावजूद एग्जाम सेंटर पहुंच जाता है, तो उसे परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है. निरीक्षक बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी या बैठने में हेल्प दे सकते हैं. हालांकि सामान्य परिस्थितियों में अतिरिक्त समय नहीं दिया जाता. एक बार छात्र प्रश्नपत्र हल करना शुरू कर देता है, तो उसे परीक्षा में शामिल माना जाएगा. बाद में बीमारी के आधार पर कोई विशेष राहत नहीं मिलती.
अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति
गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की वजह से अगर छात्र परीक्षा नहीं दे पाता, तो उसे अनुपस्थित दर्ज किया जाता है. इस आधार पर दोबारा परीक्षा का मौका नहीं मिलता. ऐसे छात्र बाद में कंपार्टमेंट परीक्षा या सुधार परीक्षा के विकल्प चुन सकते हैं.
एक विषय छूटने के परिणाम
अगर छात्र एक भी मेन विषय की परीक्षा नहीं देता, तो उसे अंतिम रिजल्ट में पास घोषित नहीं किया जा सकता. मार्कशीट में कंपार्टमेंट या दोहराव की स्थिति दिखाई दे सकती है. उस विषय को पास करने के बाद ही फुल पास प्रमाण पत्र मिलता है, चाहे अन्य विषयों में प्रदर्शन अच्छा रहा हो.
पारिवारिक आपात स्थिति पर क्या छूट है?
सीबीएसई की नीति में पारिवारिक आपात स्थिति या किसी करीबी के निधन जैसी परिस्थितियों में भी विशेष परीक्षा का प्रावधान नहीं है. स्कूल मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन बोर्ड अपने नियमों में बदलाव नहीं करता.
ग्रेस मार्क्स और परीक्षा विकल्प
ग्रेस नंबर केवल उन छात्रों को दिए जाते हैं जिन्होंने परीक्षा दी हो और मूल्यांकन के बाद कुछ अंकों से कम रह गए हों. अनुपस्थित छात्रों पर यह लागू नहीं होता. कंपार्टमेंट परीक्षा उन छात्रों के लिए होती है जो किसी एक विषय में फेल हो जाते हैं या अनुपस्थित रहते हैं. सुधार परीक्षा उन छात्रों के लिए है जो पास तो हो चुके हैं, लेकिन अपने नंबर बेहतर करना चाहते हैं.
ऐसी स्थिति में क्या करें?
अगर छात्र बीमार है, तो तुरंत स्कूल को सूचित करें और सभी मेडिकल डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखें. आगे की योजना कंपार्टमेंट परीक्षा को ध्यान में रखकर बनाएं. घबराने की जरूरत नहीं है, कई छात्र इस प्रक्रिया के जरिए सफलतापूर्वक परीक्षा पास करते हैं. सीबीएसई की परीक्षा नीति सख्त जरूर है, लेकिन स्पष्ट है. इसलिए बेहतर है कि पहले से नियम जानकर तैयारी और योजना बनाई जाए.
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