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जनरल डिब्बे में सफर करने वालों के आए अच्छे दिन, अब मिलेगी 1st AC कोच जैसी सफाई!

जनरल डिब्बे में सफर करने वालों के आए अच्छे दिन, अब मिलेगी 1st AC कोच जैसी सफाई!
जनरल डिब्बे में सफर करने वालों के आए अच्छे दिन, अब मिलेगी 1st AC कोच जैसी सफाई!

अब जनरल डिब्बे में भी मिलेगी AC जैसी सफाईImage Credit source: ai generated

भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों यात्रियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है. अब तक अक्सर देखा जाता था कि फर्स्ट क्लास या एसी कोच में तो सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रहती थी, लेकिन जनरल डिब्बों में सफर करने वाले यात्री गंदगी और बदबू के बीच यात्रा करने को मजबूर होते थे. लेकिन अब यह तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि सफाई के मामले में अब कोई भेदभाव नहीं होगा. रेलवे ने ‘रिफार्म प्लान 2026’ के तहत कमर कस ली है, जिसका सीधा असर आम आदमी की यात्रा पर पड़ने वाला है.

जनरल कोच की सफाई पर विशेष फोकस

रेलवे ने एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत अगले एक साल यानी 52 हफ्तों में 52 बड़े बदलाव (रिफार्म) किए जाएंगे. इस मुहीम की शुरुआत ‘साफ-सफाई’ से हो रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ट्रेन के हर कोच की सफाई अब यात्रा के दौरान ही की जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सफाई अभियान में जनरल कोच को प्राथमिकता दी गई है.

अक्सर देखा जाता है कि जनरल कोच ट्रेन के बाकी हिस्सों से जुड़े नहीं होते (vestibule नहीं होता), जिससे सफाई कर्मचारी चलती ट्रेन में वहां तक नहीं पहुंच पाते थे. इस समस्या का भी तोड़ निकाल लिया गया है. अब स्टेशनों पर रुकने के दौरान सफाई स्टाफ नीचे उतरकर जनरल कोच में जाएगा और वहां टॉयलेट, कचरे के डिब्बे और कोच की पूरी सफाई सुनिश्चित करेगा. इसके लिए हर जोन में शुरुआत में 4-5 ट्रेनों को चुना गया है, जिसके बाद धीरे-धीरे 80-80 ट्रेनों के समूह में इसे लागू किया जाएगा.

सफाई में कोताही नहीं, AI रखेगा हर पल नजर

रेलवे अब सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं करेगा. सफाई व्यवस्था को हाई-टेक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है. अब सफाई के बाद कोच की तस्वीरें सीधे एक कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जहां AI आधारित सिस्टम यह जांचेगा कि सफाई मानकों के अनुसार हुई है या नहीं.

अगर सफाई में कोई कमी पाई गई, तो संबंधित वेंडर या ठेकेदार पर तुरंत कार्रवाई होगी. रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट उन्हीं को दिया जाएगा जिनका ‘क्लीनिंग स्टैण्डर्ड’ बेहतरीन होगा. पीक ऑवर्स में भीड़ को देखते हुए ज्यादा स्टाफ तैनात किया जाएगा और रूट के हिसाब से टीमें काम करेंगी. मकसद साफ़ है, यात्री चाहे किसी भी श्रेणी का हो, उसे गंदगी का सामना न करना पड़े.

कार्गो टर्मिनल्स से कमाई की नई रफ़्तार

सिर्फ यात्री सुविधा ही नहीं, रेलवे ने अपनी कमाई और माल ढुलाई (कार्गो) को लेकर भी बड़े फैसले लिए हैं. गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट की समय सीमा को 35 साल से बढ़ाकर अब 50 साल कर दिया गया है. इस बदलाव से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और लंबे समय तक स्थिरता बनी रहेगी.

बीते तीन सालों में देश भर में 124 कार्गो टर्मिनल तैयार हो चुके हैं, जिससे रेलवे को 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में 500 से ज्यादा गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल बनाने का है. नए रिफॉर्म्स से अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले तीन सालों में रेलवे को इससे 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी. यह कदम न सिर्फ रेलवे की आर्थिक सेहत सुधारेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बड़ी क्रांति लाएगा.

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