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5 महीने में 3 गुना बढ़े गोल्ड-सिल्वर ETF के भाव, 3 लाख करोड़ से ज्यादा हुई वैल्यू

5 महीने में 3 गुना बढ़े गोल्ड-सिल्वर ETF के भाव, 3 लाख करोड़ से ज्यादा हुई वैल्यू
5 महीने में 3 गुना बढ़े गोल्ड-सिल्वर ETF के भाव, 3 लाख करोड़ से ज्यादा हुई वैल्यू

Gold Silver EtfImage Credit source: AI

सोने और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के मैनेजमेंट के तहत कुल एसेट्स जनवरी 2026 में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर है. कीमती धातुओं की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव रहने के बावजूद भारी निवेश आने की वजह से सिर्फ पांच महीनों में एसेट्स लगभग तीन गुना बढ़ गए. AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में जहां कुल एसेट्स करीब 1 लाख करोड़ रुपये थे, वहीं जनवरी 2026 तक यह तेजी से बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गए. ग्लोबल टेंशन के बीच एक बार फिर से निवेशक सेफ माने जाने वाले एसेट गोल्ड-सिल्वर की ओर रुख कर रहे हैं.

इस दौरान फोलियो की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की बढ़ती भागीदारी साफ नजर आती है. गोल्ड ETF के फोलियो 80.34 लाख से बढ़कर 1.14 करोड़ हो गए, जबकि सिल्वर ETF के फोलियो 11.31 लाख से बढ़कर 47.85 लाख हो गए. इसमें क्रमशः 43 फीसदी और 323 फीसदी की जोरदार बढ़त दर्ज की गई.

गोल्ड-सिल्वर में इनफ्लो बढ़ा

एसेट्स में इतनी तेज बढ़ोतरी को जनवरी 2026 में आए रिकॉर्ड निवेश का सपोर्ट मिला. AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने गोल्ड ETF में 24,039 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया, जबकि सिल्वर ETF में 9,463 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. यह आंकड़ा इक्विटी फंड्स में आए 24,029 करोड़ रुपये के निवेश से भी ज्यादा रहा. दिसंबर में गोल्ड और सिल्वर ETF में कुल मिलाकर 15,609 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जबकि इक्विटी फंड्स में 28,055 करोड़ रुपये आए थे. इससे साफ है कि लगातार दूसरे महीने इक्विटी फंड्स में निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी रही.

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज के CEO अजय गर्ग ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर ETF में बढ़ता निवेश यह संकेत नहीं देता कि शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आने वाली है. उनके मुताबिक, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश घटने की वजह यह है कि निवेशक बाजार की उठापटक और ग्लोबल अनिश्चितता से निपटने के लिए अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा कुछ समय के लिए सुरक्षित एसेट्स में डाल रहे हैं. गर्ग ने कहा कि लंबे समय के निवेशकों के लिए सोने और चांदी में करीब 10 से 15 फीसदी तक का संतुलित निवेश ठीक रहता है, लेकिन किसी एक ही एसेट में बहुत ज्यादा पैसा लगाने से जोखिम बढ़ सकता है.

सिल्वर ETF में भी बढ़ा निवेश

पिछले साल चांदी की कीमतों में आई तेज तेजी, फंड्स के अच्छे रिटर्न और चांदी की सुरक्षित निवेश और इंडस्ट्रियल मेटल दोनों तरह की भूमिका के चलते सिल्वर ETF में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद 1,000 टन से नीचे आ गई थी. इसका मतलब यह है कि हाल की तेजी सरकारों की खरीद से ज्यादा निवेशकों के निवेश के कारण आई है.

चॉइस वेल्थ के CEO निकुंज सराफ ने कहा कि सोने और चांदी में हालिया तेज़ निवेश किसी लंबे समय के स्थायी बदलाव के बजाय शॉर्ट-टर्म रिटर्न के पीछे भागने की प्रवृत्ति को दिखाता है. उनके मुताबिक, पिछले साल कीमती धातुओं ने अच्छे रिटर्न दिए हैं और निवेशक अक्सर उसी तरफ पैसा लगाते हैं जहां हाल में बेहतर प्रदर्शन दिखता है. सराफ ने कहा कि मौजूदा निवेश का बड़ा हिस्सा रणनीति के तहत किया गया लगता है, जो हाल के रिटर्न और ग्लोबल अनिश्चितता से प्रभावित है. उन्होंने यह भी कहा कि सोना और चांदी किसी भी निवेश चक्र में ज्यादा मुनाफा देने वाले एसेट की बजाय पोर्टफोलियो को स्थिर रखने का काम बेहतर तरीके से करते हैं.

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