
AI बदलेगा भारत की तस्वीर
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी 2026, महज एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय तकनीकी इतिहास का एक नया अध्याय है. यहां ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (India-AI Impact Summit 2026) का आगाज हो चुका है. अक्सर हम तकनीक की बातें करते हैं तो नजरें पश्चिम की ओर होती हैं, लेकिन हवा का रुख बदल चुका है. इस शिखर सम्मेलन ने एक बात साफ कर दी है कि भारत अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में सिर्फ एक उपभोक्ता या खरीदार नहीं रहा, बल्कि अब वह निर्माता की भूमिका में आ चुका है. दिल्ली में हो रहे इस आयोजन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं. यहां चर्चा सिर्फ कोडिंग या एल्गोरिद्म की नहीं हो रही, बल्कि इस बात पर हो रही है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक आम आदमी की जिंदगी से भुखमरी, बीमारी और असुविधा को मिटा सकता है.
ट्रेन के सफर में अब नहीं सताएगी गंदगी
भारतीय रेल में सफर करने वाले हर यात्री का सबसे कड़वा अनुभव अक्सर साफ-सफाई, खास तौर पर टॉयलेट्स को लेकर होता है. लेकिन अब यह तस्वीर बदलने वाली है. रेलवे अब सफाई की निगरानी के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है. रेलवे इंफॉर्मेशन सेंटर के चीफ प्रोजेक्ट इंजीनियर लक्ष्मण जैन ने बताया कि यह व्यवस्था महज कागजी नहीं है, बल्कि प्रायोगिक तौर पर देश की 100 ट्रेनों में इसे शुरू भी कर दिया गया है.
यह सिस्टम काम कैसे करता है, यह जानना दिलचस्प है. अब सफाई कर्मचारी को काम से बचने का मौका नहीं मिलेगा. स्टाफ को ट्रेन में चढ़ते ही अपनी फोटो ऐप पर अपलोड करनी होगी. इतना ही नहीं, जिस टॉयलेट की सफाई की जा रही है, उसकी ‘पहले’ और ‘बाद’ (Before and After) की तस्वीर भेजना अनिवार्य कर दिया गया है. यानी जब तक सफाई का सबूत नहीं, तब तक काम पूरा नहीं माना जाएगा.
‘साथी’ बनकर अन्नदाता को घाटे से बचाएगा एआई
खेती-किसानी में अनिश्चितता सबसे बड़ा डर होता है. कभी मौसम की मार, तो कभी बाजार के भाव की जानकारी न होना. लेकिन अब किसानों के लिए ‘Saathi’ (साथी) आ गया है. यह एक ऐसा एआई टूल है जो किसानों को अंधेरे में तीर चलाने से रोकेगा. यह टूल किसान की जमीन और मिट्टी के सैंपल का विश्लेषण करके बताएगा कि उस जमीन के टुकड़े पर क्या उगाना फायदेमंद रहेगा और क्या नहीं.
इतना ही नहीं, अक्सर किसानों को अच्छी खाद या बीज खरीदने के लिए भटकना पड़ता है. साथी ऐप में ई-कॉमर्स की सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे किसान सीधे उच्च गुणवत्ता वाला सामान खरीद सकेंगे. किसानों की सेहत का ख्याल रखते हुए, इसमें भविष्य में ऐसे स्मार्ट बूट्स (जूते) भी शामिल किए जाएंगे, जो मिट्टी से होने वाले इंफेक्शन से पैरों को सुरक्षित रखेंगे. यह तकनीक खेती को घाटे के सौदे से निकालकर मुनाफे के व्यापार में बदलने की ताकत रखती है.
कारखानों में ‘पुचू’ रखेगा नजर, टलेंगे बड़े हादसे
इंसानी जान की कीमत सबसे ज्यादा है, खासकर खतरनाक कारखानों में. टाटा के ग्लोबल हेड लक्ष्मण पार्थशास्त्री ने एक ऐसे डिवाइस से पर्दा उठाया है जिसका नाम है- ‘पुचू’. सुनने में यह नाम भले ही खिलौने जैसा लगे, लेकिन इसका काम बेहद संजीदा है. यह एक एआई निगरानी डिवाइस है.
फैक्ट्री के उन कोनों में जहां इंसान का पहुंचना जानलेवा हो सकता है, वहां पुचू आसानी से जा सकता है. इसमें लगे आधुनिक सेंसर और कैमरे 24 घंटे जागते रहते हैं. चाहे गैस लीक हो रही हो, कहीं आग लगने की सुगबुगाहट हो या धुएं का गुबार, पुचू तुरंत खतरे को भांप लेता है और अलर्ट भेज देता है. इसका बैटरी बैकअप इतना मजबूत है कि यह बिना सोए लगातार सुरक्षा प्रहरी की तरह काम करता है.
भारत की क्षमता पर दुनिया को भरोसा
इस समिट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के बाद भारत उनका दूसरा सबसे बड़ा यूजर बेस है. ऑल्टमैन का मानना है कि एआई की वैश्विक रेस में भारत लीडर बनने की पूरी क्षमता रखता है.
OpenAI ने पिछले साल यानी 2025 में दिल्ली में अपना पहला ऑफिस खोला था और अब 2026 में वे अपने विस्तार की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि वे भारत के लिए और भारत के साथ मिलकर एआई विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.






