Saturday, March 28, 2026
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FD करने वालों की लगेगी ‘लॉटरी’! जनता का पैसा बैंक में कम, बाजार में ज्‍यादा; समझ‍िए CD रेश्‍यो का राज


Banks Deposit in India: देश के बैंकों में क्रेड‍िट-ड‍िपॉज‍िट रेश्‍यो (CDR) बढ़कर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है. यह अब तक के र‍िकॉर्ड लेवल 83 प्रत‍िशत पर पहुंच गया है. सीडीआर (CDR) बढ़ने पर एफडी करने वालों को फायदा म‍िलता है, जबक‍ि लोन लेने वालों को इससे नुकसान है. सीडीआर का सीधा सा मतलब है क‍ि बैंकों ने अपनी ड‍िपॉज‍िट राश‍ि का 83 प्रतिशत हिस्सा लोन के रूप में दे रखा है. पिछले 15 दिन के दौरान जमा राश‍ि में 1.8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है, ज‍िसके बाद जमा राश‍ि घटकर 250 लाख करोड़ रुपये रह गई. दूसरी तरफ बैंक क्रेडिट (लोन) में 18,672 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है और यह आंकड़ा 207.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

क्‍या होता है CDR?
सीडीआर (CDR) बैंकिंग सेक्‍टर का अहम इंडिकेटर है. इससे साफ होता है क‍ि बैंक ने अपनी ड‍िपॉज‍िट राशि (Deposits) का कितना प्रत‍िशत लोन (Credit) द‍िया है? आसान भाषा में आप इसे ऐसे समझ सकते हैं क‍ि सीडीआर (CDR) (बैंक की तरफ से द‍िया गया लोन / बैंक में कुल जमा राशि) × 100. यानी बैंक में यद‍ि 1000 रुपये जमा हैं और उसमें से 800 रुपये लोन द‍िया गया है तो सीडीआर 80 प्रत‍िशत हुआ. यानी बैंक ने कुल जमा राश‍ि का 80 प्रत‍िशत लोन दे रखा है. सीडीआर बढ़ने क मतलब लोग अपना पैसा बैंक में कम बल्‍क‍ि बाजार में ज्‍यादा रख रहे हैं.

फाइनेंश‍ियल ईयर 2026 में क्‍या हुआ?
31 मार्च नजदीक है और फाइनेंश‍ियल ईयर खत्‍म होने वाला है. FY 2026 के दौरान नए लोन 25.3 लाख करोड़ रुपये के रहे. इस दौरान जमा राश‍ि एक लाख करोड़ रुपये कम यानी 24.3 लाख करोड़ रुपये ही बढ़ी. इससे साफ है क‍ि लोन की ड‍िमांड जमा के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. साल दर साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो बैंक क्रेडिट ग्रोथ 13.8 फीसदी और ड‍िपॉज‍िट ग्रोथ 10.8 फीसदी की रही.

80 फीसदी को माना जाता है हेल्‍दी रेश्‍यो
क‍िसी भी बैंक को अपनी जमा राशि का करीब 3% कैश रिजर्व रेशियो (CRR) के रूप में आरबीआई (RBI) के पास रखना जरूरी होता है. इसके अलावा 18% स्टेट्यूटरी ल‍िक्‍व‍िड‍िटी रेश‍ियो (SLR) के तौर पर सरकारी बॉन्‍ड में लगाना पड़ता है. यही कारण है क‍ि 80% के करीब का सीडी रेश्‍यो नॉर्मल और सुरक्षित माना जाता है. 83% का लेवल बताता है कि बैंकों के पास ल‍िक्‍व‍िड‍िटी कम हो रही है.

जब 100% के ऊपर हो गया था सीडी रेश्‍यो!
पिछले फाइनेंश‍ियल ईयर से पहले कोविड के बाद रिकवरी के समय सीडी रेश्‍यो लगातार 100% से ऊपर बना रहा था. उस समय लोन की ग्रोथ रेट 16-17% रहा था औार ड‍िपॉज‍िट केवल 9-10% की रफ्तार से बढ़ा था. इस सयम भी कुछ इस तरह का ही ट्रेंड चल रहा है. इस बार का कुछ हिस्सा रिपोर्टिंग से जुड़ी तारीख में बदलाव के कारण भी है. पहले रिपोर्टिंग हर महीने के दूसरे शुक्रवार को होती थी. लेक‍िन अब यह महीने की 15 और 30 तारीख को होती है. इससे तिमाही के अंत तक लोन डिसबर्समेंट ज्‍यादा द‍िख रहे हैं.

बढ़ जाएगी एफडी और ब्‍याज की दर?
बैंकों में क्रेड‍िट रेश्‍यो बढ़ने से ल‍िक्‍व‍िड‍िटी का इश्‍यू हो सकता है. ड‍िपॉज‍िट को ज्‍यादा से ज्‍यादा आकर्षित करने के लिए बैंकों की तरफ से डिपॉजिट रेट बढ़ाया जा सकता है. इसके ल‍िए बैंकों की तरफ से एफडी की ब्‍याज दर भी बढ़ाई जा सकती है. एफडी पर ब्‍याज दर बढ़ने और फंडिंग कॉस्‍ट बढ़ने से लोन की ब्‍याज दर बढ़ सकती है. बताया जा रहा है अभी सिस्टम में क‍िसी तरह की बड़ी चिंता नहीं बताई जा रही है. लेकिन यद‍ि यह गैप लंबे समय तक बना रहा तो बैंकों को ल‍िक्‍व‍िड‍िटी मैनेजमेंट पर ज्यादा फोकस करना पड़ेगा. इसके ल‍िए बैंक एफडी पर ब्‍याज दर बढ़ाने के साथ ही लोन पर भी ब्‍याज दर बढ़ा सकते हैं.

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