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सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! DA पर सामने आईं 5 बड़ी मांगें, सैलरी में हो सकती है बंपर बढ़ोतरी​

केंद्र सरकार ने अप्रैल में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद DA बढ़कर बेसिक सैलरी का 60% हो गया, जो पहले 58% था. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर साल में दो बार DA में संशोधन किया […]

केंद्र सरकार ने अप्रैल में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद DA बढ़कर बेसिक सैलरी का 60% हो गया, जो पहले 58% था. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर साल में दो बार DA में संशोधन किया जाता है. इसका मकसद बढ़ती महंगाई के असर से कर्मचारियों की आय की क्रय शक्ति को बनाए रखना है.

DA का फायदा केंद्र सरकार के कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों, रक्षा कर्मियों, बैंक कर्मचारियों और रिटायर्ड पेंशनभोगियों को मिलता है. आमतौर पर इसकी घोषणा मार्च और अक्टूबर में होती है, जबकि इसका लाभ जनवरी और जुलाई से लागू किया जाता है. निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को DA नहीं मिलता.

DA कर्मचारी के कुल वेतन पैकेज का हिस्सा होता है और हर महीने सैलरी या पेंशन के साथ दिया जाता है. इसका उद्देश्य महंगाई की वजह से बढ़े खर्च की भरपाई करना है.करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगी, जिनमें रक्षा कर्मी और रिटायर्ड कर्मचारी भी शामिल हैं, DA बढ़ोतरी से लाभान्वित होते हैं.

कर्मचारी संगठनों की DA से जुड़ी 5 प्रमुख मांगें

केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनभोगी प्रतिनिधियों ने DA को लेकर कई अहम मांगें रखी हैं. माना जा रहा है कि ये मांगें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को प्रभावित कर सकती हैं. 8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन जमा करने की प्रक्रिया 5 मार्च से शुरू की थी, जो 15 जून को बंद हो गई.

1. महंगाई के हिसाब से वेतन तय हो

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने मांग की है कि कर्मचारियों को महंगाई के अनुसार वेतन दिया जाए. संगठन ने न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये प्रति माह करने का भी प्रस्ताव रखा है.

2. DA में कम से कम 4% बढ़ोतरी और 50% पर मर्जर

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन ने मांग की है कि DA में कम से कम 4% की बढ़ोतरी की जाए और DA को 50% होने पर बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए. साथ ही न्यूनतम वेतन 65,000 रुपये प्रति माह करने की भी मांग की गई है.

3. DA को पूरी तरह महंगाई से जोड़ा जाए

नेशनल काउंसिलजॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी का कहना है कि DA की गणना पूरी तरह महंगाई आधारित मॉडल पर होनी चाहिए. संगठन ने मौजूदा 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग भी रखी है.

4. DA मर्जर पर सरकार जल्द फैसला करे

कई कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार से DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की आधिकारिक घोषणा करने की मांग की है. 7वें वेतन आयोग ने कहा था कि यदि DA 50% से अधिक हो जाए तो उसे बेसिक पे में मिलाने पर विचार किया जा सकता है. फिलहाल DA 60% तक पहुंच चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है.

5. DA की गणना का तरीका बदला जाए

AIDEF ने 8वें वेतन आयोग को दिए अपने दूसरे ज्ञापन में DA की गणना का मौजूदा फॉर्मूला बदलने की मांग की है. संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे खर्चों को ज्यादा महत्व दिया जाता है जिनकी कीमतें ज्यादा नहीं बदलतीं, जबकि कम वेतन पाने वाले कर्मचारी अपनी आय का बड़ा हिस्सा खानेपीने, शिक्षा, स्वास्थ्य, मकान किराया, दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों पर खर्च करते हैं. इसलिए DA की गणना में इन जरूरी खर्चों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए.

DA बढ़ाना क्यों है बड़ी मांग?

रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी का कहना है कि मौजूदा DA केवल महंगाई से होने वाले नुकसान की आंशिक भरपाई करता है. समय के साथ वेतन संशोधन और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच का अंतर कर्मचारियों की क्रय शक्ति को काफी प्रभावित करता है.

संगठन का यह भी कहना है कि मौजूदा वेतन संरचना में बेसिक सैलरी की बजाय भत्तों और DA पर ज्यादा जोर दिया जाता है. जबकि पेंशन और रिटायरमेंट के अधिकांश लाभ बेसिक सैलरी से जुड़े होते हैं. ऐसे में बेसिक पे कम रहने से रिटायर कर्मचारियों की लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होती है.

हालांकि, जून 2026 तक केंद्र सरकार ने DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन यह मुद्दा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि बेसिक सैलरी के आधार पर ही भविष्य निधि , पेंशन, विभिन्न भत्ते, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभ तय होते हैं. ऐसे में यदि DA मर्ज होता है या बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो कर्मचारियों की कुल आय और अन्य लाभों में भी बढ़ोतरी हो सकती है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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