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Exclusive: पहली फिल्म में ब्लाइंड लड़की और अब सीधे मगरमच्छ से टक्कर, आखिर क्यों रिस्की किरदार चुन रही हैं शनाया कपूर?

Exclusive: पहली फिल्म में ब्लाइंड लड़की और अब सीधे मगरमच्छ से टक्कर, आखिर क्यों रिस्की किरदार चुन रही हैं शनाया कपूर?
Exclusive: पहली फिल्म में ब्लाइंड लड़की और अब सीधे मगरमच्छ से टक्कर, आखिर क्यों रिस्की किरदार चुन रही हैं शनाया कपूर?

मगरमच्छ से भिड़ेंगी शनाया!

Shanaya Kapoor Interview: संजय और महीप कपूर की बेटी शनाया कपूर ‘तू या मैं’ से बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल दिखाने के लिए तैयार हैं. ये फिल्म 13 फरवरी को रिलीज होने वाली है. जहां अक्सर स्टार किड्स एक ग्लैमरस डेब्यू चुनते हैं, वहीं शनाया ने फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ से एक चुनौतीपूर्ण और रिस्की किरदार के साथ शुरुआत की थी. टीवी9 हिंदी डिजिटल के साथ की खास बातचीत में शनाया ने बताया कि कैसे उन्होंने ऑडिशन से लेकर शूटिंग तक के सफर को तय किया और उनके पिता संजय कपूर का इस पर क्या रिएक्शन था.

सवाल- अपनी दूसरी फिल्म में आप सीधे मगरमच्छ के साथ एक्टिंग कर रही हैं. किस तरह का रिस्पॉन्स मिल रहा है आपको?

शनाया का जवाब- मैं सच में बहुत ग्रेटफुल महसूस कर रही हूं. जब एक साल पहले अनाउंसमेंट वीडियो आया, तब मैं गोवा में किसी दूसरे प्रोजेक्ट की शूटिंग कर रही थी. मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि लोग इसे इतना पसंद करेंगे. जब मैंने कमेंट्स और रिएक्शंस देखे, तो मैं शॉक में थी. एक अनाउंसमेंट वीडियो को इतना प्यार मिलना और अब ट्रेलर की इतनी तारीफ, मेरे लिए ये सब ओवरवेलमिंग है और इससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया है.

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सवाल- लोग कहते हैं कि स्टार किड्स के पास स्क्रिप्ट्स की लाइन लगी होती है, आपकी क्या राय है?

शनाया का जवाब- (हंसते हुए) सच्चाई इससे थोड़ी अलग है. मैं अभी उस पोजीशन में नहीं हूं, जहां मैं खुद स्क्रिप्ट्स सेलेक्ट करूं. मैं अभी भी ऑडिशन की प्रक्रिया से गुजरती हूं और जो भी मौके मिलते हैं, उनमें बेस्ट देने की कोशिश करती हूं. जब मैं कोई स्क्रिप्ट पढ़ती हूं और मुझे उस किरदार से जुड़ाव महसूस होता है, तो मैं बस भगवान का शुक्रिया मानती हूं कि मुझे कुछ नया सीखने का मौका मिल रहा है.

सवाल- आपने पहली ही फिल्म में काफी रिस्क लिया था, आप फर्स्ट हाफ एक एक ब्लाइंड लड़की के किरदार में थीं. आपको डर नहीं लगा?

शनाया का जवाब- रिस्क तो था, क्योंकि ‘आंखों की गुस्ताखियां’ के पहले हाफ में दर्शक मेरी आंखें नहीं देख पाएंगे और एक एक्टर के लिए आंखें ही एक्सप्रेशन का सबसे बड़ा जरिया है. मुझे लगा जैसे मैं वापस लेवल वन पर जा रही हूं. मैं पिछले 3-4 साल से तैयारी कर रही थी, लेकिन जब वो फिल्म आई, तब मुझे दोबारा ‘क्लासरूम मोड’ में जाना पड़ा. मुझे फिर से सीखना पड़ा कि बिना आंखों के सीन कैसे परफॉर्म किए जाते हैं. लेकिन यही वो चुनौती थी जिसने मुझे उत्साहित किया.

सवाल- अगर ‘तू या मैं’ की बात करें तो आपको ये फिल्म मिली कैसे? क्या आपको भी ऑडिशन देना पड़ा था?

शनाया का जवाब- बिल्कुल. मुकेश छाबड़ा सर ने मुझे फिल्म के बारे में बताया था. मैं ऑडिशन के लिए गई और मुझे सिर्फ दो सीन दिए गए थे. जब उन्हें मेरा काम पसंद आया, तब मैं ऑफिस गई और पूरी स्क्रिप्ट पढ़ी. मुझे लगा कि ये कुछ अलग करने का एक शानदार मौका है. एक एक्टर के तौर पर रिस्क लेना ही आपको एक्साइटेड रखता है और ऑडिशन देना उस प्रक्रिया का हिस्सा है.

सवाल- आपकी इस नई पारी पर परिवार, खासकर आपके पिता संजय कपूर का क्या कहना है?

शनाया का जवाब- मेरी फैमिली बहुत एक्साइटेड है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि पापा पहले निर्देशक विजय सर के साथ काम कर चुके हैं. जब विजय सर ने पापा को मैसेज किया तब उन्हें लगा कि वो उनके लिए हैं. लेकिन उन्होंने लिखा था कि ‘शायद मैं अगली फिल्म आपके साथ न करूं, लेकिन आपकी बेटी के साथ कर रहा करूं’, तब पापा ने जवाब दिया, ‘ये तो और भी अच्छी बात है!’ पापा अक्सर मजाक में कहते हैं कि अब अगला प्रोजेक्ट हम साथ करेंगे. उनका सपोर्ट मेरे लिए सब कुछ है.

सवाल- आदर्श गौरव अपनी एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं, क्या इससे पहले आपने इनके कोई प्रोजेक्ट्स देखे हैं?

शनाया का जवाब- मैंने उनका काम पहले ही देखा था. जब मुझे पता चला कि हम दोनों इस फिल्म में साथ में काम करेंगे, तो मैं बहुत खुश थी. आदर्श एक बहुत ही अच्छे एक्टर हैं. हमारे वर्कशॉप के पहले दिन से ही हमारे बीच एक कंफर्ट जोन बन गया था. उन्होंने कभी मुझे ‘न्यूकमर’ की तरह महसूस नहीं होने दिया और हमेशा बराबरी का सम्मान दिया. वे सीन के दौरान इतनी एनर्जी देते हैं कि सामने वाले को बस रिएक्ट करना होता है. उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है.

जब ‘स्टार किड्स’ का टैग जुड़ जाता है, तब सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग होना भी आम बात बन जाती है. इस तरह की आलोचनाओं को आप कैसे देखती हैं?

शनाया का जवाब- मैं बहुत खुले दिल से कमेंट्स पढ़ती हूं. दर्शकों का फीडबैक मेरे लिए बहुत मायने रखता है. मैं इसे खुद को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखती हूं. अगर कोई कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म है, तो मैं उस पर काम करने की कोशिश करती हूं. वैसे घर में मेरे सबसे बड़े क्रिटिक मेरा पापा ही हैं और उनका फीडबैक बहुत मायने रखता है.

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