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पढ़े-लिखे भी ठगों के जाल में! एक्सपर्ट का खुलासा—IAS, डॉक्टर तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में गंवा रहे हैं लाखों, क्या आप भी सुरक्षित हैं?

पढ़े-लिखे भी ठगों के जाल में! एक्सपर्ट का खुलासा—IAS, डॉक्टर तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में गंवा रहे हैं लाखों, क्या आप भी सुरक्षित हैं?
पढ़े-लिखे भी ठगों के जाल में! एक्सपर्ट का खुलासा—IAS, डॉक्टर तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में गंवा रहे हैं लाखों, क्या आप भी सुरक्षित हैं?

आजकल के दौर में जहां हर चीज मोबाइल पर सिमट गई है, वहीं कुछ शातिर लोग आपकी इसी सुविधा को मुसीबत बनाने में लगे हैं. इसी गंभीर मुद्दे पर दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल के 14वें सीजन में एक बहुत ही जरूरी चर्चा हुई. अक्सर हम लिटरेचर फेस्टिवल में किताबों और शायरी की बातें सुनते हैं, लेकिन इस बार दिल्ली के मंच से ‘साइबर ठगी’ और खासतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खतरनाक स्कैम से बचने का मंत्र दिया गया. चलिए, जानते हैं कि इस फेस्ट में क्या-क्या खास बातें हुईं और आप खुद को डिजिटल अरेस्ट से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं.

क्या है ये ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नया चक्कर?
सेशन में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के निदेशक निशांत कुमार ने बहुत ही पते की बात कही. उन्होंने बताया कि आजकल ठगों ने एक नया तरीका निकाला है जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहते हैं. इसमें होता यह है कि आपको एक अनजान नंबर से कॉल आता है. सामने वाला शख्स खुद को पुलिस, CBI या कस्टम विभाग का बड़ा अधिकारी बताता है.

वह बहुत कड़क आवाज में आपसे कहेगा कि आपके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल आया है या आपका नाम किसी बड़े केस में फंस गया है. वो आपको डराएंगे कि आप कहीं जा नहीं सकते और आपको वीडियो कॉल पर ही ‘अरेस्ट’ रहना होगा. इसी डर का फायदा उठाकर वो केस रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं. निशांत कुमार ने साफ-साफ शब्दों में एक बात दोहराई, “कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द ही नहीं है.”

कोई भी असली पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी कभी भी फोन पर आपसे पूछताछ नहीं करती. न ही कोई सरकारी विभाग आपसे फोन पर पैसे की मांग करता है. अगर कोई आपको वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर करे, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है.

अक्सर हमें लगता है कि साइबर ठगी का शिकार वही होते हैं जिन्हें तकनीक की समझ नहीं है. लेकिन यहां चौंकाने वाली बात सामने आई. निशांत कुमार ने बताया कि ठगों के निशाने पर सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और ऊंचे पदों पर बैठे लोग होते हैं. वजह बहुत सिंपल है सामाजिक प्रतिष्ठा का डर. इन लोगों को लगता है कि अगर पुलिस के लफड़े में नाम आया तो समाज में बदनामी होगी. ठग इसी ‘डर’ और ‘जल्दबाजी’ का फायदा उठाते हैं. वे आपको सोचने का समय ही नहीं देते और डरा-धमकाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं.

भारत में डिजिटल सेवाएं जिस तेजी से बढ़ी हैं, वह काबिले तारीफ है. लेकिन सुरक्षा के बिना ये सुविधा किसी खतरे से कम नहीं. चर्चा के दौरान कुछ अहम सुझाव दिए गए. घबराएं नहीं. अगर कोई ‘पुलिस वाला’ बनकर फोन करे, तो सबसे पहले शांत रहें. उनसे उनका नाम, आईडी और ऑफिस का पता पूछें. फोन काटने के बाद उस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नंबर चेक करें. अपना बैंक अकाउंट, ओटीपी या कोई भी पर्सनल जानकारी अनजान कॉल पर कभी न दें. सरकार की ‘साइबर दोस्त’ पहल सोशल मीडिया पर लगातार टिप्स देती रहती है, उन्हें फॉलो करें.

अगर खुदा-न-खास्ता आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा कुछ हो जाए, तो हाथ पर हाथ धरकर बैठने की जरूरत नहीं है. तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें. यह नंबर खासतौर पर साइबर अपराधों के लिए बनाया गया है. आप cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं. दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल ने इस बार सिर्फ कहानियों से दिल नहीं जीता, बल्कि हकीकत से रूबरू कराया.

Jack
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