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Eclipse Astrology: क्या सच में ग्रहण लाता है अशुभ असर? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

Eclipse Astrology: क्या सच में ग्रहण लाता है अशुभ असर? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र
Eclipse Astrology: क्या सच में ग्रहण लाता है अशुभ असर? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

ग्रहण का ज्योतिषीय रहस्यImage Credit source: PTI

Astrological Effects of Eclipse: खगोल विज्ञान के लिए ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है. जब भी सूर्य या चंद्रमा पर ग्रहण लगता है, तो लोगों के मन में एक ही सवाल उठता है क्या यह वाकई अशुभ फल देगा? साल 2026 की शुरुआत होने वाली है और इस साल भी आसमान में ग्रहण के अद्भुत नजारे दिखने वाले हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि ज्योतिष इसके बारे में क्या कहता है और इस साल कब-कब ग्रहण लगने वाले हैं.

ग्रहण और ज्योतिष, शुभ या अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में ऊर्जा का संतुलन बदलता है. इसे अशुभ मानने के पीछे मुख्य रूप से सूतक काल वजह मानी जाती है. सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. मान्यता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं.

वहीं ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव राशियों पर पड़ता है. हालांकि, यह पूरी तरह अशुभ नहीं होता, कई बार यह आध्यात्मिक उन्नति का भी समय होता है. इसलिए विज्ञान इसे छाया का खेल मानता है, जबकि ज्योतिष इसे ग्रहों की चाल और मानव जीवन पर उनके प्रभाव से जोड़कर देखता है.

साल 2026 में कब-कब लगेंगे ग्रहण

  • सूर्य ग्रहण 2026 (17 फरवरी)
  • साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा.
  • क्या यह भारत में दिखेगा? नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.

क्या सूतक लगेगा? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता, वहाँ उसका सूतक काल मान्य नहीं होता. इसलिए भारत में रहने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है.

चंद्र ग्रहण 2026 (3 मार्च)

सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह ग्रहण काफी खास है क्योंकि इसी दिन होलिका दहन का पर्व भी मनाया जाएगा.

क्या यह भारत में दिखेगा?

हां, यह चंद्र ग्रहण भारत में पूरी तरह दिखाई देगा.

होलिका दहन पर असर: चूंकि यह भारत में दिखाई देगा , इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा. होलिका दहन और पूजा के समय पर इसका प्रभाव पड़ सकता है.

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

  • मंत्र जाप: ग्रहण के समय इष्ट देव का ध्यान और मंत्रों का जाप करना फलदायी माना जाता है.
  • सूतक का पालन: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान की परंपरा है.
  • भोजन का ध्यान: पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि वह दूषित न हो.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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