दिल्ली की इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है. Morgan Stanley के मुताबिक, यह पॉलिसी साफ और क्लीन गाड़ियों की तरफ तेजी से बदलाव ला सकती है. लेकिन असली चुनौती सिर्फ दिल्ली में नहीं, बल्कि तब आएगी जब दूसरे राज्य भी ऐसी ही नीतियां अपनाएंगे.

ऑटो इंडस्ट्री के लिए मुश्किल बढ़ सकती है
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी ऑटो कंपनियों पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि में गाड़ियों की बिक्री देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत कम है. यानी अगर दिल्ली में कुछ बदलाव होता भी है, तो पूरे देश की कंपनियों पर उसका बड़ा असर नहीं होगा. लेकिन चिंता की बात यह है कि अगर यही नियम अन्य राज्य भी लागू करने लगे, तो ऑटो इंडस्ट्री के लिए मुश्किल बढ़ सकती है. लोग आसपास के राज्यों से गाड़ियां खरीद सकते हैं, इसलिए तुरंत बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन धीरेधीरे असर दिख सकता है.
Morgan Stanley की रिपोर्ट
ने यह भी कहा है कि दोपहिया सेगमेंट में कंपनियों को ज्यादा दिक्कत हो सकती है, क्योंकि अभी इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर के अच्छे ऑप्शन कम हैं. इसी वजह से कंपनियों और डीलर्स की तरफ से विरोध भी देखने को मिल सकता है. पहले भी चंडीगढ़ ने पेट्रोल और डीजल दोपहिया पर रोक लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे 2027 तक टाल दिया गया.
गाड़ियों को हटाना ही समाधान नहीं है
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ कंपनियां जैसे Hero MotoCorp, Bajaj Auto और TVS Motor पहले से ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर काम कर रही हैं, इसलिए वे इस बदलाव के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं. वहीं Eicher Motors के लिए उसकी नई इलेक्ट्रिक बाइक की सफलता बहुत जरूरी मानी जा रही है.Morgan Stanley का मानना है कि सिर्फ गाड़ियों को हटाना ही समाधान नहीं है. पुरानी गाड़ियों को समय पर हटाना और बदलना ज्यादा असरदार तरीका हो सकता है, जिससे प्रदूषण कम किया जा सके.
डीजल गाड़ियों पर रोक लगाने की योजना
दिल्ली EV पॉलिसी के तहत धीरेधीरे पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर रोक लगाने की योजना है. जैसे 2027 से कुछ कमर्शियल वाहन इलेक्ट्रिक होंगे और 2028 से नए दोपहिया वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे. सरकार का टारगेट है कि 2030 तक स्कूल बसों का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक हो जाए.इसके साथ ही सरकार लगभग 32,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना बना रही है और इस पूरी नीति के लिए भारी निवेश भी किया जा रहा है.




