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1 करोड़ से ऊपर के घरों की मांग बढ़ी, हिस्सेदारी 28% पहुंची

1 करोड़ से ऊपर के घरों की मांग बढ़ी, हिस्सेदारी 28% पहुंची
1 करोड़ से ऊपर के घरों की मांग बढ़ी, हिस्सेदारी 28% पहुंची

रियल एस्टेट

रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म प्रॉपइक्विटी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 15 प्रमुख टियर-2 शहरों में 2025 के दौरान घरों की बिक्री 10% घटकर 1,56,181 यूनिट रह गई. हालांकि कुल बिक्री मूल्य लगभग स्थिर रहा और 1.48 लाख करोड़ रुपये के आसपास बना रहा.

प्रॉपइक्विटी के फाउंडर और सीईओ समीर जसूजा के अनुसार, पिछले दो सालों में बिक्री में आई सुस्ती की बड़ी वजह 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की कम होती सप्लाई है. टियर-2 शहरों में यही सेगमेंट आम तौर पर सबसे ज्यादा मांग पैदा करता था.

सस्ते घर कम, प्रीमियम सेगमेंट मजबूत

जमीन और निर्माण लागत बढ़ने के कारण नए प्रोजेक्ट अब ऊंची कीमतों में लॉन्च हो रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री में 9% की बढ़ोतरी हुई है. इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 2024 में 23% थी, जो 2025 में बढ़कर 28% हो गई. समीर जसूजा का कहना है कि अब टियर-2 बाजार धीरे-धीरे टियर-1 शहरों जैसा होता जा रहा है, जहां बिक्री की संख्या घटती है लेकिन कीमतें बढ़ती रहती हैं.

किन शहरों में कितनी गिरावट?

अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, नासिक, जयपुर, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, भोपाल, गोवा, विशाखापट्टनम और कोच्चि जैसे शहरों में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई. विशाखापट्टनम में सबसे ज्यादा 38% की गिरावट रही. वहीं मोहाली में 34% और लखनऊ में 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

विशेषज्ञों की राय

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि टियर-2 शहरों में अब प्रीमियम और लाइफस्टाइल आधारित घरों की मांग बढ़ रही है, खासकर 12 करोड़ रुपये के दायरे में. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों के चलते इन शहरों में निवेशकों और खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ रही है. कुल मिलाकर, टियर-2 रियल एस्टेट बाजार में सस्ते घरों की कमी से बिक्री घटी है, लेकिन महंगे और प्रीमियम घरों की मांग मजबूत बनी हुई है.

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