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दिल्ली BMW केस: कोर्ट ने चार्जशीट पर लिया संज्ञान, आरोपी गगन प्रीत को समन

दिल्ली BMW केस: कोर्ट ने चार्जशीट पर लिया संज्ञान, आरोपी गगन प्रीत को समन
दिल्ली BMW केस: कोर्ट ने चार्जशीट पर लिया संज्ञान, आरोपी गगन प्रीत को समन

फाइल फोटो

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को 2025 में BMW एक्सीडेंट में फाइनेंस मिनिस्ट्री में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत के मामले में आरोपी गगन प्रीत कौर मक्कड़ को समन जारी किया. कोर्ट ने गगन प्रीत कौर खिलाफ फाइल की गई दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद समन जारी किया है.

चार्जशीट में गैर-इरादतन हत्या की कोशिश से जुड़ी एक धारा लगाई गई है और दिल्ली पुलिस ने कहा कि एक्सीडेंट आरोपी की गलती से हुआ और वह जानबूझकर आरोपी को दूर के हॉस्पिटल ले गई थी. इसलिए, पुलिस ने कहा कि कौर पर BNS की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के साथ-साथ सेक्शन 281, 125B और 238A BNS के तहत चार्जशीट दायर की गई है.

कोर्ट जारी किया समन

दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद पटियाला हाउस के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अंकित गर्ग ने चार्जशीट पर लिया और गगन प्रीत मक्कड़ को 2 फरवरी के लिए समन जारी किया. कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर दलीलें सुनी. चार्जशीट में BNS के सेक्शन 105 के साथ-साथ सेक्शन 281, 125B और 238A के तहत सजा वाला अपराध शामिल किया गया है.

कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट पहली नजर में अपराध का खुलासा करती है. जज ने कहा कि मैंने चार्जशीट और चार्जशीट के साथ अटैच किए गए डॉक्यूमेंट्स को देखा है. यह पहली नज़र में अपराध होने का खुलासा करता है. कोर्ट ने 22 जनवरी को मामले में आदेश देते हुए कहा कि वो अपराध का कॉग्निजेंस ले रहे हैं, आरोपी को अगली सुनवाई की तारीख के लिए समन जारी किया जाए.

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में क्या कहा था?

दिल्ली पुलिस ने दिसंबर 2025 में धौला कुआं BMW एक्सीडेंट केस में चार्जशीट फाइल की थी. आरोपी गगनप्रीत कौर के खिलाफ फाइल की गई दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि पीड़ित को समय पर मेडिकल केयर से बचाया जा सकता था. लेकिन, पीड़ित को 23 मिनट दूर न्यू लाइफ हॉस्पिटल ले जाने की वजह से ट्रॉमा का गोल्डन आवर खत्म हो गया. दूसरे हॉस्पिटल जैसे आर्मी बेस हॉस्पिटल और AIIMS, महज़ 10-15 मिनट की दूरी पर थे.

चार्जशीट BNS की धारा 281, 125(b), 105, 238(a) के तहत फाइल की गई थी. जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में 34 गवाह समेत तकरीबन 400 दस्तावेज शामिल हैं. अहम बात ये है कि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, बचने का समय कम से कम 15 मिनट है. पुलिस ने दावा किया है कि एम्बुलेंस ड्राइवर और सहायक के बयान सेक्शन BNSS के 180 के तहत लिए गए हैं और एम्बुलेंस की कोई गलती नहीं है. DTC ड्राइवर का बयान भी दर्ज किए गए.

घायल दूर के हॉस्पिटल लेके गई कौर

आरोपी कौर कथित घायल को तौर पर पास के हॉस्पिटल (दिल्ली कैंटोनमेंट हॉस्पिटल / AIIMS ट्रॉमा सेंटर) जोकि सिर्फ 10-15 मिनट दूर थे. इसके बजाय घायल को न्यू लाइफ हॉस्पिटल, GTB नगर (तकरीबन 20 किलोमीटर दूर) लेकर गई. हॉस्पिटल तक पहुंचने में 23 मिनट लगे.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि मेडिकल इलाज में देरी की वजह से ट्रॉमा केयर का गोल्डन आवर खत्म हो गया. न्यू लाइफ हॉस्पिटल एक छोटा दो-मंजिला नर्सिंग होम है. जिसमें मेडिकल सुविधाएं कम हैं. आरोप है कि कुछ ही मिनटों में एक पैरामेडिक के साथ एक एंबुलेंस मौके पर पहुंच गई; लेकिन, आरोपी ने कथित तौर पर एम्बुलेंस की मदद लेने से मना कर दिया. पुलिस ने कहा है कि एम्बुलेंस स्टाफ की कोई गलती नहीं थी। मेडिकल मदद देने में जानबूझकर देरी की गई. आरोप है कि आरोपी ने मामूली चोटों के बावजूद खुद को ICU में भर्ती कराया ताकि जांच करने वालों को गुमराह किया जा सके.

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