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बरेली में ‘मुर्दा’ हुआ जिंदा, RTO पहुंच भाई के नाम ट्रांसफर की कार; कागज पर दस्तखत देख पत्नी हैरान – Khabar Monkey

बरेली में ‘मुर्दा’ हुआ जिंदा, RTO पहुंच भाई के नाम ट्रांसफर की कार; कागज पर दस्तखत देख पत्नी हैरान – Khabar Monkey
बरेली में 'मुर्दा' हुआ जिंदा, RTO पहुंच भाई के नाम ट्रांसफर की कार; कागज पर दस्तखत देख पत्नी हैरान

बरेली RTO (फाइल फोटो).

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के बारादरी थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति की मौत के करीब एक साल बाद उसकी गाड़ी RTO रिकॉर्ड में जिंदा दिखाकर उसके ही छोटे भाई के नाम ट्रांसफर कर दी गई. इस पूरे मामले में RTO के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है. ADG रमित शर्मा के आदेश पर अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

आनंदा पार्क सुपर सिटी की रहने वाली नंदिनी वर्मा ने बताया कि उनके पति अजय वर्मा की मौत 14 जुलाई 2019 को हो चुकी थी. अजय वर्मा की ट्रैवल्स की एजेंसी थी और उनके नाम कई गाड़ियां रजिस्टर्ड थीं. पति के निधन के बाद नंदिनी ही पूरा काम संभाल रही थीं. वारिसान प्रमाण पत्र बनने में देरी के कारण गाड़ियां अभी भी अजय वर्मा के नाम पर ही थीं.

देवर ने अपने नाम ट्रांसफर करा ली कार

नंदिनी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उन्होंने RTO की वेबसाइट पर गाड़ियों का विवरण देखा. उन्हें पता चला कि एक कार 2 सितंबर 2020 को उनके देवर विशाल वर्मा के नाम ट्रांसफर हो चुकी है, जबकि उस समय तक अजय वर्मा को गुजरे एक साल से ज्यादा हो चुका था. नियम के अनुसार, गाड़ी ट्रांसफर के समय वाहन मालिक का जीवित होना और उसकी मौजूदगी जरूरी होती है, लेकिन इस मामले में कागजों में मृतक को जिंदा दिखा दिया गया.

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अजय वर्मा हमेशा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते थे, जबकि ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों में हिंदी में अंगूठा या साइन दर्ज किया गया. इससे साफ जाहिर होता है कि कागज पूरी तरह फर्जी तरीके से तैयार किए गए.

पोर्टल और RTI से खुला फर्जीवाड़ा, पुलिस पर भी उठे सवाल

नंदिनी वर्मा ने जब RTO कार्यालय में जानकारी ली तो उन्हें टालमटोल किया गया. इसके बाद उन्होंने RTI के जरिए कागजात मंगवाए. RTI में जो जानकारी सामने आई, उसने पूरे फर्जीवाड़े की पोल खोल दी. कागजों में दिखाया गया कि अजय वर्मा खुद RTO कार्यालय पहुंचे थे और उन्होंने गाड़ी ट्रांसफर के लिए सहमति दी थी, जो पूरी तरह झूठ है.

पीड़िता का आरोप है कि उन्होंने पहले कैंट थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इसी दौरान आरोपी देवर विशाल वर्मा समझौते का दबाव बनाने लगा और बच्चों के अपहरण तक की धमकी देने लगा. पुलिस की सुस्ती से परेशान होकर नंदिनी वर्मा ने आखिरकार ADG रमित शर्मा से शिकायत की.

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ADG रमित शर्मा के सख्त निर्देश के बाद कैंट पुलिस ने आरोपी विशाल वर्मा और RTO के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया. पुलिस अब RTO की उस फाइल से जुड़े सभी कर्मचारियों की सूची खंगाल रही है, जिन्होंने इस ट्रांसफर को मंजूरी दी थी. वहीं इस मामले ने RTO सिस्टम की कार्यप्रणाली और पुलिस की शुरुआती लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल जांच जारी है और पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है.

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