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भारत के ये 5 राज्य वर्ल्ड बैंक के ‘अपर-मिडिल इनकम’ क्लब में शामिल, लेकिन यूपी-बिहार का हाल बेहाल!​

देश की अर्थव्यवस्था किस तेजी से बढ़ रही है, इसका असली अंदाजा तब लगता है जब हम राष्ट्रीय औसत से आगे बढ़कर राज्यों की स्थिति देखते हैं. हाल ही में विश्व बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को उनकी बेहतर कमाई के आधार पर उच्च आय वर्ग में प्रमोट […]

देश की अर्थव्यवस्था किस तेजी से बढ़ रही है, इसका असली अंदाजा तब लगता है जब हम राष्ट्रीय औसत से आगे बढ़कर राज्यों की स्थिति देखते हैं. हाल ही में विश्व बैंक ने अपनी नई रिपोर्ट में श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को उनकी बेहतर कमाई के आधार पर उच्च आय वर्ग में प्रमोट किया है. जब इसी पैमाने पर भारत को देखा गया, तो एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई.

भारत राष्ट्रीय स्तर पर 2,760 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ अभी भी ‘लोअरमिडिल इनकम’ वाला देश है. ये आंकड़ा लोअरमिडिल इनकम के वैश्विक औसत 2,488 डॉलर से थोड़ा ही ज्यादा है. लेकिन, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पांच राज्यों ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए विश्व बैंक के 4,636 डॉलर के ‘अपरमिडिल इनकम’ वाले कटऑफ को पार कर लिया है.

इसे समझने के लिए विश्व बैंक का पैमाना जानना जरूरी है. बैंक 1,175 डॉलर से कम आय वालों को ‘लो इनकम’, 1,175 से 4,635 डॉलर वालों को ‘लोअरमिडिल इनकम’, 4,636 से 14,375 डॉलर वालों को ‘अपरमिडिल इनकम’ और 14,375 डॉलर से ऊपर वालों को ‘हाई इनकम’ वाला देश मानता है.

दिल्ली और कर्नाटक ने मारी बाजी

राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली 6,217 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ पूरे देश में पहले नंबर पर है. इसके बाद कर्नाटक , तेलंगाना , तमिलनाडु और गुजरात का नंबर आता है. ये पांचों राज्य विश्व बैंक के अपरमिडिल इनकम वाले बेंचमार्क से काफी ऊपर निकल चुके हैं.

अगर हम इन राज्यों की तुलना दुनिया के अन्य देशों से करें, तो आज दिल्ली की अर्थव्यवस्था दक्षिण अफ्रीका , फिजी और मंगोलिया जैसे देशों को टक्कर दे रही है. वहीं, कर्नाटक और तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय इंडोनेशिया और वियतनाम से भी ज्यादा हो चुकी है. यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि साल 1994 में भारत का कोई भी बड़ा राज्य इस आय वर्ग के आसपास भी नहीं भटकता था.

बालबाल चूके महाराष्ट्र और हरियाणा

इस सूची में कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जो बहुत ही मामूली अंतर से इस क्लब में शामिल होने से रह गए. देश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले महाराष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय 4,628 डॉलर रही. यानी यह राज्य अपरमिडिल इनकम के कटऑफ से मात्र 8 डॉलर पीछे रह गया. इसी तरह, हरियाणा 4,627 डॉलर के साथ केवल 9 डॉलर से और केरल 4,610 डॉलर की आय के साथ महज 26 डॉलर के अंतर से इस बेंचमार्क को पार करने से चूक गए.

यूपीबिहार की स्थिति चिंताजनक

एक तरफ जहां कुछ राज्य तरक्की के नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, वहीं देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. बिहार 984 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय के साथ भारत का सबसे गरीब बड़ा राज्य बना हुआ है. उत्तर प्रदेश की आय ,1403 डॉलर और झारखंड की 1,470 डॉलर दर्ज की गई है. आंकड़े बताते हैं कि इन तीनों राज्यों के लोगों की औसत कमाई हमारे पड़ोसी देश नेपाल और उपसहारा अफ्रीका के कई गरीब देशों से भी कम है.

आर्थिक तरक्की के इस दौर में राज्यों के बीच की यह खाई लगातार चौड़ी हो रही है. असमानता को मापने वाला गिनी गुणांक , जो साल 199495 में 0.230 था, वह 202526 के अनुमानों में बढ़कर 0.261 हो गया है. सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्यों के बीच का अंतर 2.38 गुना से बढ़कर 3.73 गुना हो गया है. यानी, देश में आर्थिक विकास तो हुआ है, लेकिन इसका फायदा सभी राज्यों को समान रूप से नहीं मिला.

30 साल के सफर में किसने क्या खोया और क्या पाया

बीते तीन दशकों के विकास का विश्लेषण करें, तो मध्यम आय वाले राज्यों ने सबसे तेजी से तरक्की की है. 199495 के बाद से इन राज्यों की अर्थव्यवस्था में 36.7 गुना की वृद्धि हुई है. वहीं, सबसे अमीर राज्यों के समूह में 28.3 गुना और सबसे गरीब राज्यों में मात्र 26.6 गुना का विकास देखा गया.

इन तीस सालों में कई राज्यों की किस्मत पूरी तरह बदल गई है. कभी उत्तर प्रदेश और ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय लगभग एक बराबर हुआ करती थी, लेकिन आज ओडिशा के लोग यूपी वालों की तुलना में 75 प्रतिशत ज्यादा कमाते हैं. इसी तरह, कभी झारखंड के स्तर पर खड़े असम की प्रति व्यक्ति आय आज झारखंड से 48 प्रतिशत ज्यादा हो चुकी है. सबसे बड़ा नुकसान पंजाब को हुआ है. 199495 में जो पंजाब पूरे देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला राज्य था, आज वह राजस्थान के स्तर पर आ गया है और देश के सात अन्य राज्यों से पीछे छूट चुका है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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