Business

बजट 2026 में आम आदमी को राहत की आस, टैक्स और रोजगार पर नजर

बजट 2026 में आम आदमी को राहत की आस, टैक्स और रोजगार पर नजर
बजट 2026 में आम आदमी को राहत की आस, टैक्स और रोजगार पर नजर

केंद्रीय बजट 2026

केंद्रीय बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, देश के अर्थशास्त्री सरकार की संभावित प्राथमिकताओं को लेकर अपनी राय रख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बजट में रोजगार सृजन, कृषि विकास, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन इकॉनमी पर खास जोर देखने को मिल सकता है. आम आदमी को भी टैक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर राहत की उम्मीद है.

रोजगार और कृषि पर रहेगा खास जोर

उस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सतीश रायकिन्डी के मुताबिक, सरकार टिकाऊ विकास को ध्यान में रखते हुए रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे सकती है. उनके अनुसार, समावेशी मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भी सरकार के एजेंडे में अहम रहेंगे. इससे न सिर्फ आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच संतुलन भी बेहतर होगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME और ग्रीन इकॉनमी अहम

रायकिन्डी ने कहा कि बजट में रक्षा, रेलवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, MSME, ग्रामीण विकास और ग्रीन इकॉनमी पर निवेश बढ़ सकता है. इन क्षेत्रों में फोकस से नई नौकरियां पैदा होंगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, आम आदमी टैक्स स्लैब में राहत, सस्ता आवास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा को लेकर उम्मीद लगाए बैठा है.

निवेश का संतुलन जरूरी

प्रोफेसर एम. रामुलु ने निवेश के मौजूदा रुझान पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि फिलहाल निवेश पूंजी-प्रधान उद्योगों और बड़े शहरों तक सीमित है, जिससे प्रदूषण और आबादी का दबाव बढ़ रहा है. उनका सुझाव है कि निवेश स्टार्टअप्स, छोटे उद्योगों, कृषि-आधारित और क्षेत्रीय उद्योगों तक पहुंचना चाहिए, ताकि सभी राज्यों में संतुलित विकास हो सके.

वेलफेयर योजनाओं पर पुनर्विचार की जरूरत

रामुलु ने वेलफेयर योजनाओं को लेकर कहा कि सही जरूरतमंदों की पहचान बेहद जरूरी है. कई योजनाओं का लाभ ऐसे लोगों तक पहुंच रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि वेलफेयर सिर्फ मुफ्त अनाज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए.

GST और टैक्स सुधार की मांग

GST को लेकर रामुलु ने कहा कि यह एक अच्छा सिस्टम है, लेकिन टैक्स के बंटवारे को लेकर राज्यों में असंतोष है. उन्होंने टैक्स रेट कम कर ज्यादा लोगों को टैक्स दायरे में लाने की सलाह दी, ताकि लोग स्वेच्छा से अपनी आय घोषित करें और राजस्व बढ़े.

संतुलित विकास पर नजर

कुल मिलाकर, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर संसाधनों का सही इस्तेमाल, निवेश का संतुलन और वेलफेयर योजनाओं का बेहतर लक्ष्यीकरण किया जाए, तो बजट 2026 देश की विकास दर को नई ऊंचाई दे सकता है.

Khabar Monkey
the authorKhabar Monkey