
प्रयागराजः उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब और गंभीर होता दिख रहा है। शिष्यों का दावा है कि शंकराचार्य की जान को खतरा है। इसी आशंका के चलते उनके शिविर के भीतर और बाहर कुल 12 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं।
शिष्यों ने लगाए गंभीर आरोप
शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य इस समय सड़क पर बैठे हैं और आसपास ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो संत के वेश में शैतानी हरकतें कर रहे हैं। रात के समय कुछ लोग शिविर के पास आकर वीडियो बनाते हैं और पकड़े जाने पर नोटिस देने की बात कहते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे तत्वों से शंकराचार्य की सुरक्षा को खतरा है।
इस बीच अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत भी लगातार खराब बनी हुई है। शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें तेज बुखार हो गया। रात में दवा लेने के बावजूद उनकी हालत में पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है।
विवाद के बीच गरमाई सियासत
शंकराचार्य विवाद पर अब सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलकर अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि शंकराचार्य डटे हुए हैं और एक-एक सनातनी उनके साथ खड़ा है। अखिलेश ने दावा किया कि अविमुक्तेश्वरानंद ने नकली सनातनियों की पोल खोल दी है और सपा का उनसे सीधा संवाद बना हुआ है।
केशव प्रसाद मौर्य जैसा हो सीएम
इससे पहले शुक्रवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ करते हुए उन्हें समझदार नेता बताया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री वही होना चाहिए, जो यह समझ सके कि अफसरों से गलती हुई है। वहीं, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम कर उनसे स्नान करने की अपील की थी।
पूरा विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था, जब शंकराचार्य पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। इस दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
इसके बाद प्रशासन ने उन्हें 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए—एक में शंकराचार्य की पदवी को लेकर सवाल उठाया गया, जबकि दूसरे में मौनी अमावस्या के घटनाक्रम पर जवाब मांगा गया। नोटिस में माघ मेले से स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी भी दी गई थी, जिसका जवाब अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से भेज दिया गया है।






