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BSEB 12th Exams: एक मिनट की देरी से टूटे सपने… एग्जाम सेंटर के बाहर छात्राओं के छलके आंसू; नियमों की सख्ती से हुआ ये हाल

BSEB 12th Exams: एक मिनट की देरी से टूटे सपने… एग्जाम सेंटर के बाहर छात्राओं के छलके आंसू; नियमों की सख्ती से हुआ ये हाल
BSEB 12th Exams: एक मिनट की देरी से टूटे सपने... एग्जाम सेंटर के बाहर छात्राओं के छलके आंसू; नियमों की सख्ती से हुआ ये हाल

देरी से पहुंचने के बाद नहीं मिली एंट्री तो छात्राओं के छलके आंसू

बिहार में आज से इंटरमीडिएट की परीक्षा की शुरुआत हो गई. BSEB की ओर से पहले ही छात्र-छात्राओं और स्कूलों को एग्जाम के दौरान सख्य नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे. निर्देशों की लिस्ट भी जारी की गई थी. बिहार बोर्ड ने साफ किया था कि नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जीरो टोलरेंस पॉलिसी अपनाई जा रही है ताकि नकल को पूरी तरह से रोका जा सके. लेकिन, इस सख्ती की वजह से बिहार में कुछ एग्जाम सेंटरों के बाहर लेट हुए छात्र-छात्राएं रोते-बिलखते हुए दिखाई दिए.

बिहार के भागलपुर में सख्त नियमों ने कई छात्राओं के सपनों पर ही ताला जड़ दिया. नियम के अनुसार एग्जाम शुरू होने से पहले सभी छात्रों को एग्जाम सेंटर पहुंचना था. एग्जाम का समय होने के बाद किसी भी हालत में छात्रों को एग्जाम सेंटर में एंट्री नहीं दी जा सकती. ऐसे में कई एग्जाम सेंटरों के बाहर 9 बजते ही ताले लगा दिए गए. ऐसी हालत में जो छात्र-छात्राएं महज 1 से 4 मिनट की देरी से एग्जाम सेंटर पहुंचे उनके लिए परीक्षा देने से मना कर दिया गया और एंट्री नहीं दी गई. जरा सी देरी की वजह से उनके हाथ से फाइनल एग्जाम का पेपर मिस हो गया.

एग्जाम सेंटर के बाहर बिलखती दिखीं छात्राएं

भागलपुर के मारवाड़ी पाठशाला और सूरज देवी मिश्रीलाल परीक्षा केंद्र समेत कई केंद्रों पर दिल को झकझोर देने वाले दृश्य देखने को मिले. परीक्षा केंद्र के गेट बंद होते ही बाहर खड़ी छात्राएं रोती-बिलखती रहीं. किसी की आंखों में डर साफ झलक रहा था तो किसी के चेहरे पर पूरे साल की मेहनत टूटते सपनों में बदलती नजर आई. परिजन भी बेबस दिखे. कोई अपनी बेटी को सीने से लगाकर ढांढस बंधा रहा था तो कोई उसकी आंखों से बहते आंसू पोंछते हुए खुद टूटता नजर आया.

हाथ जोड़े, गुहार लगाई लेकिन नहीं मिली एंट्री

देरी से पहुंचीं छात्राओं ने मौके पर तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों से बार-बार गुहार लगाई. किसी ने हाथ जोड़कर माफी मांगी, तो किसी ने दोबारा ऐसी गलती न करने की कसम खाई, लेकिन नियमों की दीवार इतनी सख्त रही कि एक मिनट की भी मोहलत नहीं दी गई. इस सख्ती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या कुछ मिनट की देरी किसी छात्रा का पूरा साल बर्बाद करने के लिए काफी है? क्या नियमों के साथ मानवीय संवेदना की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए?

59 केंद्रों पर हो रही परीक्षा

आपको बता दें कि भागलपुर में कुल 59 परीक्षा केंद्रों पर इंटरमीडिएट की परीक्षा आयोजित की जा रही है जिसमें 44 हजार 644 परीक्षार्थी शामिल हैं. पहले दिन पहली पाली में बायोलॉजी और दूसरी पाली में फिलॉसफी की परीक्षा हो रही है.

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