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चीन को पटखनी देने का बड़ा प्लान, बजट में 23000 करोड़ की सौगात देने की तैयारी

चीन को पटखनी देने का बड़ा प्लान, बजट में 23000 करोड़ की सौगात देने की तैयारी
चीन को पटखनी देने का बड़ा प्लान, बजट में 23000 करोड़ की सौगात देने की तैयारी

बजट में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बड़े ऐलान हो सकते हैं.Image Credit source: ChatGPT

इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करने और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन को पीछे छोड़ने का भारत सरकार ने एक मास्टर प्लान किया है. जिसका ऐलान बजट में किया जा सकता है. मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार आगामी बजट में 23,000 करोड़ रुपए तक के इंसेंटिव की घोषणा कर सकता है, जिसका उद्देश्य महंगे कैपिटन गुड्स या यूं कहें कि हैवी मशीनरी के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सके और इंपोर्ट पर निर्भरता को कम किया जा सके. एक सीनियर ऑफिशियल ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि योजनाएं तैयार की जा रही हैं और बजट में इनकी घोषणा की जा सकती है.

किस सेक्टारर को मिलेगा कितना पैसा?

अधिकारी ने बताया कि निर्माण उपकरणों के लिए 14,000-16,000 करोड़ रुपए के इंसेंटिव प्रोग्राम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए मजबूत ग्लोबल वैल्यू चेन (जीवीसी) स्थापित करने के लिए 7,000 करोड़ रुपए की योजना पर भी काम चल रहा है. प्रस्तावित उपायों का उद्देश्य कैपिटल गुड्स सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाना है. जनवरी 2022 में, भारी उद्योग मंत्रालय ने भारतीय कैपिटल गुड्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के दूसरे की शुरुआत की, जिसमें साझा टेक और टेस्टिंग इंफ्रा को समर्थन देने के लिए 1,207 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था.

हैवी ​मशीनरी का निर्माण

केंद्र सरकार ने 2025-26 के केंद्रीय बजट में लोकन लिथियम-आयन बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी निर्माण के लिए 35 अतिरिक्त कैपिटल गुड्स और मोबाइल फोन बैटरी उत्पादन के लिए 28 अतिरिक्त कैपिटल गुड्स पर सीमा शुल्क छूट का विस्तार किया है. अधिकारी ने बताया कि निर्माण उपकरण पैकेज का लक्ष्य टनल बोरिंग मशीन और क्रेन जैसी हाई लेवल मशीनरी का स्वदेशीकरण करना है, जिससे इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो सके. मूल्य के हिसाब से इस क्षेत्र के लगभग आधे घटक वर्तमान में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी सहित अन्य देशों से आयात किए जाते हैं.

जब चीन ने लगाया था प्रतिबंध

चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीन के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत में प्रमुख इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को प्रभावित किया था. बीजिंग ने पिछले साल नई दिल्ली के साथ हाई लेवल राजनयिक वार्ता के बाद प्रतिबंध हटा दिए थे. इस सेक्टर में आयातित प्रमुख घटकों में हाइड्रोलिक्स, अंडरकैरिज और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ईसीयू), सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे उच्च तकनीक वाले घटक शामिल हैं. अधिकारी ने कहा इस योजना से भारी और पूरी तरह से निर्मित मशीनों का आयात कम होगा और साथ ही यह भी बताया कि नए कार्यक्रम मौजूदा प्रोत्साहन उपायों से प्राप्त लाभों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

लोकली होगा 360 डिग्री कैमरे और सेंसर निर्माण

जीवीसी योजना का मुख्य उद्देश्य आधुनिक कार उपकरणों जैसे एडवांस ड्राइवर असिसटेंस सिस्टम, 360 डिग्री कैमरे और सेंसर के लोकल लेवल पर निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना है. अधिकारी ने कहा कि इन विशिष्ट ऑटोमोटिव पुर्जों के 50 फीसदी घरेलू मूल्यवर्धन के साथ लोकन निर्माण को समर्थन दिया जाएगा, और यह भी बताया कि इससे निर्यात के अवसर भी खुल सकते हैं. ऑटो पार्ट्स के निर्माण में उपयोग होने वाले मोल्ड और पावर टूल्स जैसे कैपिटल ग्रुड्स की खरीद पर सब्सिडी भी इस नई योजना का हिस्सा होगी. इस योजना के तहत प्रोटोटाइपिंग सेंटर्स की स्थापना को भी समर्थन दिया जाएगा.

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