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ED के बड़े अफसर पर बड़ी कार्रवाई, नौकरी से जबरन रिटायर करने की वजह क्या

ED के बड़े अफसर पर बड़ी कार्रवाई, नौकरी से जबरन रिटायर करने की वजह क्या
ED के बड़े अफसर पर बड़ी कार्रवाई, नौकरी से जबरन रिटायर करने की वजह क्या

प्रवर्तन निदेशालय

केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डिप्टी डायरेक्टर पी राधाकृष्णन को नौकरी से हटा दिया गया और उन्हें जबरन रिटायर कर दिया गया. राधाकृष्णन जिन्होंने डिप्लोमैटिक गोल्ड स्मगलिंग केस सहित कई अहम मामलों की जांच की थी, को अब रिश्वत लेने और छापेमारी की जानकारी लीक करने के आरोप में नौकरी से हटा दिया गया.

वित्त मंत्रालय ने रिश्वत लेने और सरकारी जानकारी लीक करने की शिकायतों के आधार पर उन्हें जबरन रिटायरमेंट देने का आदेश जारी किया. राष्ट्रपति ने पिछले शुक्रवार को इस आदेश पर अपने साइन किए, जो केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार और गलत कामों के खिलाफ उठाए गए असाधारण कदम का हिस्सा है.

जांच का आगे नहीं बढ़ना और बीजेपी का आरोप

केरल के तिरुवनंतपुरम के रहने वाले पी राधाकृष्णन वही अधिकारी थे जिन्होंने विवादित डिप्लोमैटिक गोल्ड स्मगलिंग केस (Diplomatic Gold Smuggling Case) की जांच की अगुवाई की थी. हालांकि, उन पर गंभीर आरोप भी लगे थे. उन पर आरोप था कि जब जांच एक अहम मोड़ पर पहुंची तो उन्होंने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की. तब बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने जांच को पटरी से उतारने और छापेमारी की जानकारी लीक करने में मिलीभगत की थी.

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंची जांच के अचानक रोके जाने से बड़े विवाद खड़े हो गए थे. उस समय बड़ा आरोप यही लगा था कि स्वप्ना सुरेश, एम शिवशंकर और अन्य की गिरफ्तारी के बाद जांच का आगे न बढ़ना समझौते का हिस्सा था.

क्यों राधाकृष्णन के खिलाफ बढ़ता गया शक

मामले की जांच पूरी करने के लिए प्रमोशन और चेन्नई ट्रांसफर होने के बावजूद, राधाकृष्णन कोच्चि में ही बने रहे. बाद में, उन्होंने करुवन्नूर बैंक फ्रॉड केस समेत कुछ अन्य केस भी देखे, लेकिन उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई. इस बीच, वित्त मंत्रालय की ओर से की गई एक आंतरिक जांच में पाया गया कि उनके खिलाफ शिकायतों, जिसमें रिश्वत लेने और जानकारी लीक करने जैसे आरोप शामिल थे, में सच्चाई थी. इसके आधार पर, उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की गई.

राधाकृष्णन को हटाया जाना, केंद्र सरकार की नौकरी में रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ यह एक दुर्लभ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई है. जबरन रिटायरमेंट फंडामेंटल रूल 56 (j) के तहत किया गया है. यह एक ऐसा प्रावधान है जो केंद्र सरकार को सार्वजनिक हित में कथित भ्रष्टाचार या अक्षमता के लिए अधिकारियों को नौकरी से हटाने का अधिकार देता है.

क्यों चर्चा में आया गोल्ड स्मगलिंग केस

डिप्लोमैटिक गोल्ड स्मगलिंग केस की जांच में राधाकृष्णन की अहम भूमिका रही थी. वह मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर और स्वप्ना सुरेश से पूछताछ करने और उन्हें गिरफ्तार करने में सबसे आगे थे. लेकिन, ऐसे समय में जब ऐसा लग रहा था कि मामले की जांच यूएई दूतावास और प्रशासन के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचेगी, अचानक जांच में सुस्ती आ गई और पूरी जांच ही गंभीर संदेह के घेरे में चली गई.

खुफिया रिपोर्ट में पता चला कि जांच के दौरान कई अहम सबूत एकत्र करने में ढिलाई बरती गई थी और उसने रेड होने से पहले बिचौलियों के जरिए जानकारी लीक करके आरोपी को सबूत नष्ट करने में मदद की थी.

आरोप के बाद जांच हुई शुरू, रिपोर्ट दर्ज

माना जाता है कि बीजेपी के प्रदेश इकाई ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से इस संबंध में कई बार शिकायत की थी कि मामले की जांच में बाधा डाली जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया था कि जांच एजेंसियों के कुछ अधिकारियों और सत्ताधारी पार्टी के कुछ लोगों के बीच मिलीभगत की वजह से जांच में गड़बड़ी की गई. स्वप्ना सुरेश ने आगे चलकर खुलासा किया कि सोने की तस्करी के मामले को खत्म करने के एवज में 30 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई थी.

रिश्वत लेने के आरोपों के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो ने मामले की गहन जांच शुरू की और राधाकृष्णन के खिलाफ रिपोर्ट दायर की. प्रवर्तन निदेशालय के बड़े अधिकारियों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा एजेंसी की विश्वसनीयता बहाल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

अफसर के खिलाफ लगे कई गंभीर आरोप

गोल्ड स्मगलिंग के मामले के अलावा, करुवन्नूर कोऑपरेटिव बैंक फ्रॉड केस में भी उन पर इसी तरह की मिलीभगत करने के आरोप लगे. उनके खिलाफ आरोप था कि CPM नेताओं के खिलाफ पक्के सबूत होने के बावजूद करुवन्नूर बैंक फ्रॉड केस में समय पर जांच नहीं की गई. चेन्नई जोनल ऑफिस में जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर ट्रांसफर होने के बावजूद कोच्चि में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर ही बने रहे जिससे उनके खिलाफ शक की सुई घूम गई. फिर अधिकारी के खिलाफ यह भी खुलासा हुआ कि कोच्चि में रहकर उन्होंने जांच की जानकारी लीक की और आरोपियों को भागने का मौका दिया.

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हालांकि इस तरह के एक्शन पर राजनीति भी हुई. राज्य सरकार की ओर आरोप लगाया गया कि केंद्र राजनीतिक फायदे के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि इस कदम का मकसद केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय एजेंसियों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है.

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