
महाकाल भस्म आरती
Mahakal Bhasma Aarti: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाया जाता है. इस दिन विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा की जाती है. साथ ही व्रत किया जाता है. ये दिन महादेव की कृपा प्राप्ति के लिए शुभ अवसर माना जाता है. इसी दिन देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. वहीं, उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. यहां भगवान शिव महाकाल के रूप में विराजमान हैं.
पूजा के समय महाकाल की भस्म आरती की जाती है. ये आरती रोजाना छह बार की जाती है. भस्म आरती सबसे अधिक प्रसिद्ध है. इस आरती में शामिल होने और महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भस्म आरती में महिलाओं को शामिल होने की अनुमति नहीं मिलती है? ये सवाल लोगों के मन में हमेशा आता है कि आखिर किस वजह से महिलाओं को भस्म आरती में शामिल होने से मना किया जाता है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
भस्म आरती में महाकाल का रूप होता है उग्र
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोजाना सुबह तड़के भगवान महाकाल का विधिपूर्वक स्नान कराया जाता है. इस दौरान महाकाल के वस्त्र और आभूषण उतार दिए जाते हैं. उस समय भगवान पूर्ण रूप से निर्वस्त्र होते हैं, इसलिए महिलाओं को महाकाल के इस रूप के दर्शन नहीं कराए जाते हैं. भस्म आरती के दौरान महाकाल का रूप बेहद उग्र और शक्तिशाली होता है.
इस वजह से महिलाओं को करना होता है घूंघट
यही कारण है कि महिलाओं को भस्म आरती देखने की इजाजत नहीं दी जाती. महाकाल की भस्म आरती को लेकर महिलाओं के लिए नियम बनाए गए हैं. आरती के दौरान महिलाओं को घूंघट करना होता है. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा माना जाता है. महाकाल के दर्शन के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं. यह आरती रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में की जाती है. इस आरती में शामिल होने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है. नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.






