
भारत यूएस ट्रेड डील की वजह से विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में फरवरी के महीने में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है.Image Credit source: ChatGPT
अमेरिका-भारत ट्रेड डील ने ना सिर्फ ग्लोबल ट्रेड की सूरत को बदलने का काम किया है. वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार के दिन बदलने का भी प्रयास किया है. फरवरी के महीने में विदेशी निवेशकों में एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार में विश्वास जगा और जमकर पैसा लगाया. फरवरी के महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर चुके हैं. जबकि इससे पहले लगातार तीन महीनों से विदेशी निवेशक शेयर बाजार से काफी मोटा पैसा निकाल चुके थे. वैसे मौजूदा साल की बात करें तो भी विदेशी निवेशक शेयर बाजार से 16 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा निकाल चुके हैं. जोकि जनवरी के महीने में 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का देखने को मिला था. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर एनएसडीएल में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.
फरवरी में एफपीआई ने किया जमकर निवेश
अमेरिका और भारत व्यापार समझौते के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में 19,675 करोड़ रुपए डाले हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई का यह प्रवाह लगातार तीन माह की भारी बिकवाली के बाद हुआ है. एफपीआई ने जनवरी में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपए, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपए और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपए निकाले थे. कुल मिलाकर, 2025 में, एफपीआई ने भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपए (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की है. यह एफपीआई के प्रवाह की दृष्टि से सबसे खराब वर्षों में रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (13 फरवरी तक) शेयरों में 19,675 करोड़ रुपए का निवेश किया है.
क्यों FPI रहे मेहरबान?
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर – रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हालिया खरीदारी को ग्लोबल मैक्रो चिंताओं में कमी, विशेष रूप से अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला, जिससे ब्याज दर साइकिल के प्रति सकारात्मक भावना पैदा हुई, जिसने बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर को स्थिर करने में मदद की. इससे भारत सहित उभरते बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार हुआ. उन्होंने आगे कहा कि घरेलू स्तर पर, स्थिर मैक्रो इंडीकेटर, स्थिर महंगाई और लगभग समान कॉर्पोरेट इनकम ने भारत के ग्रोथ सिनेरियो में विश्वास को मजबूत किया. एंजल वन के सीनियर प्रिंसीपल एनालिस्ट, वकार जावेद खान ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश प्रवाह अमेरिका-भारत व्यापार समझौते, राजकोषीय प्रोत्साहन के साथ सहायक केंद्रीय बजट 2026, वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं में कमी और स्थिर घरेलू दरों से प्रेरित था.
13 में से 7 सेशंस में की खरीदारी
फरवरी में 13 तारीख तक के ग्यारह ट्रेडिंग सत्रों में से सात में एफपीआई शुद्ध खरीदार रहे और केवल चार मौकों पर विक्रय किया. इसके बावजूद, आंकड़ों से पता चलता है कि एफपीआई ने इस महीने अब तक 1,374 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं. 13 फरवरी को निफ्टी में 336 अंकों की गिरावट के कारण 7,395 करोड़ रुपए की भारी बिकवाली हुई, जिससे कुल आंकड़ा प्रभावित हुआ. इस सप्ताह तथाकथित “मानवजनित संकट” के बीच आईटी शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि संभवतः एफपीआई ने नकदी बाजार में आईटी शेयरों की आक्रामक रूप से बिक्री की, क्योंकि 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान आईटी सूचकांक में 8.2 प्रतिशत की गिरावट आई.






