दिल्ली के एक ग्राहक ने फेल हुए एटीएम ट्रांजैक्शन के 4 साल पुराने मामले में आखिरकार जीत हासिल कर ली। दिल्ली के एक स्थानीय उपभोक्ता अदालत ने ATM से ट्रांजैक्शन फेल होने के बावजूद खाताधारक को कई महीनों तक रकम नहीं लौटाए जाने पर एक सरकारी बैंक को 10,000 रुपये लौटाने के साथ ही मुआवजा और कानूनी खर्च भी देने का आदेश दिया है। जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया को ‘सेवा में कमी’ का दोषी ठहराया। बैंक एटीएम से कैश न निकलने के बावजूद ग्राहक को रकम वापस करने में नाकाम रहा था।

जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने अपने फैसले में क्या कहा
आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य रश्मि बंसल की पीठ ने 22 मई को जारी आदेश में कहा, ”देरी से रकम वापस करने पर मुआवजे से संबंधित रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का मकसद सिर्फ असफल एटीएम लेनदेन से जुड़ी शिकायतों का जल्द समाधान करना और ग्राहक के पैसे की तुरंत वापसी सुनिश्चित करना ही नहीं है, बल्कि ग्राहक को मुआवजा देना भी है। ये इसलिए किया जाता है ताकि असफल एटीएम लेनदेन की शिकायतों में लापरवाही पर बैंकों की जवाबदेही तय की जा सके।”
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26 मई, 2022 का है मामला
उत्तरी दिल्ली के जहांगीरपुरी की रहने वाली शिकायतकर्ता चंदा ने 26 मई, 2022 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक एटीएम से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की थी। हालांकि, एटीएम ट्रांजैक्शन फेल हो गया और कैश नहीं निकला, फिर भी बैंक ऑफ इंडिया के उनके खाते से 10,000 रुपये की रकम कट गई थी। शिकायतकर्ता ने बैंक से संपर्क कर 7 जून, 2022 को एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने रकम वापस करने की मांग की।
बार-बार शिकायत के बावजूद बैंक ने नहीं लौटाया पैसा
हालांकि, बार-बार गुहार लगाने के बावजूद ये पैसा उनके खाते में जमा नहीं किया गया। आयोग ने पाया कि नोटिस दिए जाने के बावजूद दोनों बैंक उसके सामने पेश नहीं हुए, जिसके बाद उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। असफल एटीएम लेनदेन को नियंत्रित करने वाले रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों को आधार बनाते हुए उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बैंकों को ऐसे असफल लेनदेन को 5 दिनों के भीतर लौटाना जरूरी है। ऐसा न करने पर, देरी के लिए ग्राहक को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
पीटीआई इनपुट्स के साथ





