
महिला वोटर्स की संख्या में उछाल
असम में स्पेशल रिवीजन (SR) के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो गई है. 2.43 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के उलट, असम में SR प्रोसेस घर-घर जाकर वेरिफिकेशन के जरिए किया गया. इसके लिए पूरे राज्य में कुल 29,656 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) लगाए गए थे. SR के मुताबिक, राज्य के वोटर लगभग 2.5 करोड़ हो गए, जो पिछले 25 सालों में एक करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी है.
परसेंटेज के हिसाब से फाइनल इलेक्टोरल रोल में पिछले साल दिसंबर में पब्लिश हुई ड्राफ्ट रोल की तुलना में 0.97% की गिरावट दर्ज की गई. अधिकारियों ने इस प्रोसेस के दौरान 4,78,992 मृत वोटर, 5,23,680 शिफ्ट हुए वोटर और 53,619 मल्टीपल एंट्री की पहचान की. चुनाव आयोग ने कहा कि वह इन नामों को हटाने या शिफ्ट करने की प्रोसेस सिर्फ़ क्लेम और ऑब्जेक्शन के समय के दौरान फॉर्मल एप्लीकेशन के बाद ही करेगा.
पुरुष-महिला वोटर्स लगभग बराबर
फाइनल रोल की सबसे खास बात जेंडर बैलेंस है. असम की मतदाता सूची में दशकों तक पुरुषों का दबदबा रहा है. ये पहली बार है जब दोनों के आंकड़ों में ज्यादा अंतर नहीं है. इस बार महिलाओं की हिस्सेदारी 49.9% है, जो पुरुषों से सिर्फ 6,630 वोटर्स पीछे हैं.
पहले पुरुष-महिला वोटरों के बीच का अंतर पांच लाख से सात लाख वोटरों के बीच रहा है. 2001 में पुरुषों की संख्या महिलाओं से पांच लाख ज्यादा थी. 2016 तक यह अंतर बढ़कर 6.78 लाख हो गया. 2021 में हालात बदलने लगे, जब महिलाओं ने इस अंतर को कम करके 3.22 लाख कर दिया.
पिछले कुछ वर्षों में आया बदलाव
पिछली कुछ वर्षों में असम के वोटरों में काफी बदलाव आया है. 2001 में 1.4 करोड़ वोटरों से 2026 में रोल बढ़कर लगभग 2.5 करोड़ हो गए हैं, जो 73% की बढ़ोतरी है. यह डेमोग्राफिक बदलाव और लगातार एनरोलमेंट ड्राइव, दोनों को दिखाता है. हालांकि अलग-अलग समय में इसकी रफ़्तार अलग-अलग रही है. सबसे बड़ी बढ़त 2001 और 2006 के बीच आई, जब रोल 20% से ज्यादा बढ़े, जबकि सबसे धीमा दौर 2006 और 2011 के बीच था, जिसमें ग्रोथ सिर्फ 4% से थोड़ी ज्यादा थी.
2016 और 2021 के बीच वोटरों की संख्या में 15.7% की बढ़ोतरी हुई, जो नए साइकिल में घटकर 8.6% रह गई. कुल मिलाकर, असम का चुनावी सफर दोहरी कहानी कहता है. वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और जेंडर गैप में कमी. ये नंबर सिर्फ डेमोग्राफिक ग्रोथ ही नहीं दिखाते, बल्कि वोटर ग्रुप में भी बदलाव दिखाते हैं, जो पहले से कहीं ज़्यादा बड़ा, ज़्यादा सबको साथ लेकर चलने वाला और ज्यादा बैलेंस्ड है.
असम में आयोग ने जो SR लागू किया, उसमें BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर्स ने घर-घर जाकर सिर्फ उन नामों और जानकारियों को सत्यापित किया जो पहले से रजिस्टर में दर्ज हैं. इसमें फॉर्म भरवाकर पूरी नई सूची नहीं तैयार की गई. इसका सीधा मतलब है कि सूची को सही किया गया, लेकिन SIR जैसी गहन जांच नहीं हुई. यह तरीका विवाद कम पैदा करता है.






