PoliticsViral

‘अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया’—डॉ वेलुमणि की एक लाइन ने पैरेंटिंग पर छेड़ दी देशव्यापी बहस

‘अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया’—डॉ वेलुमणि की एक लाइन ने पैरेंटिंग पर छेड़ दी देशव्यापी बहस
‘अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया’—डॉ वेलुमणि की एक लाइन ने पैरेंटिंग पर छेड़ दी देशव्यापी बहस

सोशल मीडिया पर अक्सर रिश्तों, शादी या लाइफस्टाइल को लेकर बहस छिड़ती रहती है, लेकिन इस बार चर्चा का विषय बना है पालन-पोषण यानी पैरेंटिंग. थायरोकेयर के संस्थापक और जाने-माने बिजनेस लीडर डॉ ए वेलुमणि की एक पोस्ट ने इंटरनेट पर लंबी बहस छेड़ दी है. बच्चों की परवरिश को लेकर उनकी सोच ने कुछ लोगों को सहमति में सिर हिलाने पर मजबूर किया, तो कुछ को असहज भी कर दिया. पोस्ट वायरल होते ही यह सवाल फिर सामने आ गया कि बच्चों को मजबूत बनाने का सही तरीका क्या है, प्यार और तारीफ या सख्ती और चुनौती.

डॉ वेलुमणि ने बताए ‘दो तरह के माता-पिता’
डॉ ए वेलुमणि ने अपनी पोस्ट में माता-पिता को दो श्रेणियों में बांटा. उन्होंने इसे “टाइप A” और “टाइप B” नाम दिया. उनके मुताबिक टाइप A माता-पिता वे होते हैं जो बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी बड़े स्तर पर सेलिब्रेट करते हैं. बच्चों की तारीफ खुलकर करते हैं, पड़ोसियों को बताते हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं और कई बार उन्हें विदेश यात्रा जैसे इनाम भी देते हैं. वेलुमणि ने लिखा कि इस प्रक्रिया में माता-पिता और बच्चे दोनों खुश रहते हैं.

टाइप B पैरेंटिंग को बताया मजबूत इंसान बनाने वाला
पोस्ट में टाइप B माता-पिता की सोच को अलग बताया गया है. वेलुमणि के अनुसार ऐसे माता-पिता बच्चे को एक छोटी समस्या हल करने देते हैं, फिर धीरे-धीरे उससे बड़ी चुनौती सामने रखते हैं. साल दर साल जिम्मेदारियां बढ़ती जाती हैं, जिससे बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत बनता है. उन्होंने दावा किया कि यही तरीका बच्चों को “manyfold stronger” यानी कई गुना सक्षम वयस्क बनाता है.

‘Parent! Do not Pamper!!’ लाइन बनी बहस की वजह
डॉ वेलुमणि की पोस्ट की आखिरी पंक्ति “Parent! Do not Pamper!!” सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई. कई यूजर्स ने इसे सख्त लेकिन जरूरी संदेश बताया, जबकि कुछ ने इसे एकतरफा सोच करार दिया. यही लाइन पोस्ट के वायरल होने की बड़ी वजह बनी.

समर्थन में बोले यूजर्स – सख्ती से बनता है चरित्र
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने वेलुमणि की सोच का समर्थन किया. एक यूजर ने लिखा कि टाइप A पैरेंटिंग नाजुक अहंकार बनाती है, जबकि टाइप B मजबूत इच्छाशक्ति. दूसरे यूजर ने कहा कि बच्चों को हर वक्त सराहना देना आसान है, लेकिन उन्हें चुनौती देना ही असली तैयारी है. उनके मुताबिक आराम चरित्र नहीं बनाता, जिम्मेदारी बनाती है.

Jack
the authorJack
Hello friends, Welcome you all to my website. I am the founder of www.khabarmonkey.com. I am SEO/SMO Expert, Digital Marketing, Content Writer and Site Developer

Leave a Reply