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ट्रंप ने निकाला भारत के आईटी सेक्टर का दम, एक झटके में दिग्गजों के साफ हो गए 55,000 करोड़​

बीते कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. बुधवार को शेयर बाजार में और ज्यादा तीखी गिरावट देखने को मिली. इस बार ये गिरावट भारतीय आईटी सेक्टर के प्रेशर में आने से देखने को मिली. वास्तव में अमेरिका ने दुनिया की बड़ी आईटी कंपनियों में से कॉग्निजेंट की […]

बीते कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. बुधवार को शेयर बाजार में और ज्यादा तीखी गिरावट देखने को मिली. इस बार ये गिरावट भारतीय आईटी सेक्टर के प्रेशर में आने से देखने को मिली. वास्तव में अमेरिका ने दुनिया की बड़ी आईटी कंपनियों में से कॉग्निजेंट की ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ फाइलिंग को सस्पेंड कर दिया. इससे ट्रंप प्रशासन के कथित वीज़ा फ्रॉड के खिलाफ अभियान के असर को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं. इसी वजह से भारतीय आईटी सेक्टर में गिरावट देखी गई और देश की दिग्गज आईटी कंपनियों की वैल्यूएशन से 55 हजार करोड़ रुपए गायब हो गए. गिरावट में इंफोसिस सबसे आगे रही, जिसके शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा की कमी आई. टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में भी लगभग 33 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि टीसीएस, एमफेजिज, विप्रो और एलटीआईमाइंडट्री के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

क्यों आई शेयरों में गिरावट?

यह बिकवाली तब हुई जब अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने कॉग्निजेंट की ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ प्रोग्राम के तहत फाइलिंग को सस्पेंड कर दिया. यह प्रक्रिया उन नियोक्ताओं के लिए एक अहम कदम है जो रोजगारबेस्ड ग्रीन कार्ड के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करना चाहते हैं. इस कदम की घोषणा अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने की. संघीय अधिकारी कथित धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों को संभावित नुकसान की जांच कर रहे हैं. डी’एस्पोसिटो ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कॉग्निजेंट की PERM फाइलिंग सस्पेंड कर दी गई हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए खतरों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. @WHFraudTF के साथ मिलकर हम तथ्यों, धोखाधड़ी और वित्तीय मामलों की जांच कर रहे हैं. हथकड़ियां तैयार हैं.

नहीं दी ज्यादा जानकारी

डी’एस्पोसिटो ने बताया कि यह जांच श्रम विभाग के अधिकारियों और व्हाइट हाउस की एंटीफ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर की जा रही है. उन्होंने कॉग्निजेंट के खिलाफ स्पेसिफिक आरोपों, प्रभावित आवेदनों की संख्या या सस्पेंशन की अवधि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. इंस्पेक्टर जनरल ने अलग से यह भी घोषणा की कि क्लाउडएरा की PERM फाइलिंग भी सस्पेंड कर दी गई हैं. इंस्पेक्टर जनरल द्वारा जारी जानकारी में किसी भी कंपनी के खिलाफ आपराधिक आरोपों का ज़िक्र नहीं था, और न ही इसमें कॉग्निजेंट या क्लाउडएरा की कोई प्रतिक्रिया शामिल थी.

अमेरिकी ग्रेजुएट को नौकरी

यह कार्रवाई कॉग्निजेंट द्वारा अमेरिका में अपनी वर्कफोर्स बढ़ाने की योजना की घोषणा के एक दिन बाद हुई. कंपनी ने कहा कि वह 1,500 अमेरिकी कॉलेज ग्रेजुएट्स को नौकरी देगी और अपनी ‘फ्रंटियर सर्टिफाइड इंजीनियर’ और ‘फ्रंटियर बिजनेस ऑपरेटर’ वर्कफोर्स को बढ़ाकर 15,000 लोगों तक ले जाएगी. चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रवि कुमार एस ने कहा कि हम अमेरिकी ग्रेजुएट को नौकरी पर रख रहे हैं, AI के दौर के लिए नई अमेरिकी जॉब कैटेगरी बना रहे हैं, और कॉग्निजेंट की कैपिटल और लीडरशिप को एक ऐसे नेशनल गठबंधन के साथ जोड़ रहे हैं जो यह पक्का करे कि यह बदलाव कर्मचारियों के लिए फायदेमंद हो. कुमार ने कहा कि हमारा मानना ​​है कि AI जितनी नौकरियां खत्म करेगा, उससे कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा करेगा और अमेरिकी वर्कफोर्स के फ्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए ज्यादा वैल्यू, सैलरी और जवाबदेही लाएगा.

दस लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग

कॉग्निजेंट ने यह भी कहा कि वह RAISE US में शामिल हो गया है, जो एक दोनों पार्टियों का गठबंधन है और अमेरिकी कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोनॉमी में ढलने में मदद करने पर केंद्रित है. इसके ‘सिनेप्स’ प्रोग्राम ने दस लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी है और 2030 तक बीस लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. PERM प्रोग्राम के तहत, लेबर डिपार्टमेंट को यह सर्टिफाई करना होता है कि किसी पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से उसी तरह के काम में लगे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या काम की स्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा.

PERM और में अंतर

PERM सर्टिफिकेशन स्थायी नौकरी और नौकरीबेस्ड ग्रीन कार्ड से जुड़ा है. यह H1B प्रोग्राम से अलग है, जो योग्य अमेरिकी नियोक्ताओं को खास कामों के लिए विदेशी प्रोफेशनल्स को कुछ समय के लिए नौकरी पर रखने की इजाजत देता है. PERM फाइलिंग को रोकने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी की H1B याचिकाओं को भी रोक दिया गया है. कॉग्निज़ेंट का हेडक्वार्टर टीनेक, न्यू जर्सी में है और यह नैस्डैक पर CTSH टिकर के तहत लिस्टेड है. कंपनी की स्थापना 1994 में चेन्नई में हुई थी और भारत में इसकी बड़ी वर्कफोर्स और ऑपरेशनल मौजूदगी है. दलाल स्ट्रीट पर, कोफोर्ज के शेयरों में लगभग 9% की गिरावट आई, हालांकि यह गिरावट एक अलग घटना की वजह से हुई थी. ऑडिट के बाद कंपनी के चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया.

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संपादकीय टीम

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