गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में शिपिंग पर हमले और बढ़ते हैं, तो कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की चिंताओं के बीच तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के कोहेड, डान स्ट्रुइवेन ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हाल की घटनाओं से पता चलता है कि शिपिंग में रुकावटें बढ़ने और हालात बिगड़ने का जोखिम एक बड़ी चिंता बन गया है.

वीकेंड पर हालात तब और बिगड़ गए जब अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के तीन तेल टैंकर्स पर हमला किया है. यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिका के दो वॉरशिप्स पर हमले के बाद की गई थी. इसके बाद ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने कहा कि “बराबर की जवाबी कार्रवाई” का दौर खत्म हो गया है और चेतावनी दी कि ईरान की भविष्य की जवाबी कार्रवाई “तेज, ज्यादा जबरदस्त और ज्यादा दर्दनाक” होगी.
ईरान ने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में एक नया “एक्सक्लूजन जोन” घोषित करेगा. यह जोन अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी वाली लाइन से शुरू होकर होर्मुज स्ट्रेट की ओर और फिर फारस की खाड़ी तक फैलेगा. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए प्रमुख मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के इरादे से इस इलाके में आने वाले और ईरान द्वारा पहचाने गए किसी भी जहाज को प्रतिबंधों की लिस्ट में डाल दिया जाएगा.
स्ट्रुइवेन ने कहा कि गोल्डमैन सैक्स को “कच्चे तेल की कीमतों में अच्छीखासी बढ़ोतरी” की उम्मीद है, साथ ही उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे नेचुरल गैस और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की ऊंची कीमतों पर दांव लगाएं. उन्होंने कहा कि गैस और फ्यूल के मामले में, सप्लाई में आने वाली रुकावटें कच्चे तेल के बाजार की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ी हैं.
99 डॉलर के पार कच्चे तेल के दाम
बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. . ईरान ने अपनी संपत्तियों पर अमेरिका के किसी भी और हमले का बदला लेने की धमकी दी, जिससे मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक संघर्ष चलने का खतरा बढ़ गया और कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की चिंता पैदा हो गई.
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.37 डॉलर या 1.40% बढ़कर 99.30 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.33 डॉलर या 1.43 फीसदी बढ़कर 94.36 प्रति बैरल हो गया. पिछले सेशन में ब्रेंट 24 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, क्योंकि ट्रेडर्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के बीच रिस्क प्रीमियम को ध्यान में रखते हुए कीमतें तय कीं.
ईरान ने सोमवार को कहा कि खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें अमेरिका के तेल और गैस से जुड़े हित भी शामिल हैं, खतरे में पड़ सकते हैं. यह चेतावनी वीकेंड पर हुई जवाबी कार्रवाई के बाद आई, जिसमें किसी भी तरह की कूटनीतिक सफलता के संकेत नहीं मिले.
दूसरे एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
तेल की कीमतों के लिए रुकावट कितने समय तक रहती है, यह बहुत अहम होगा. जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रुकावट का हर अतिरिक्त महीना ब्रेंट की कीमतों में लगभग 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर सकता है. अगर यह रुकावट तीन महीने तक जारी रहती है, तो बैंक को उम्मीद है कि ब्रेंट की औसत मासिक कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी.
ANZ के एनालिस्ट्स ने भी शॉर्टटर्म ब्रेंट का अपना अनुमान बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है और चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है कि अमेरिका और ईरान के बीच नपेतुले मिलिट्री एक्शन के साथ लंबे समय तक गतिरोध बना रहेगा, जिससे मिडिल ईस्ट से पूरी सप्लाई बहाल होने में देरी हो सकती है.
फ्रंटमंथ ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट, अक्टूबर 2027 के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले लगभग 20 डॉलर के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जो इसकी कीमत का लगभग पांचवां हिस्सा है. इससे पता चलता है कि मार्केट अगले साल मिलने वाले बैरल की तुलना में आज उपलब्ध बैरल के लिए ज्यादा प्रीमियम दे रहा है. कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के हेड अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, ब्रेंट का रुख पॉजिटिव बना हुआ है.
बनर्जी ने कहा कि 90 डॉलर अब ब्रेंट के लिए एक मजबूत निचला स्तर है, जबकि 102 डॉलर कोर रेजिस्टेंस लेवल है. 102 डॉलर के ऊपर जाने पर कीमतों में जबरदस्त तेजी आ सकती है और कीमतें 115116 डॉलर की ओर बढ़ सकती हैं. तब तक, ब्रेंट के उस ऊपरी स्तर से नीचे पॉजिटिव रुख के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है.
भारत में कच्चे तेल के दाम
वैसे भारत के वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. लेकिन मंगलवार को बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ. एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार कच्चे तेल के दाम में 24 रुपए प्रति बैरल की गिरावट देखी गई और दाम 8734 रुपए प्रति बैरल पर बंद हुए. वैसे कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड के दाम 8,959 रुपए प्रति बैरल के साथ दिन के हाई पर पहुंच गए थे. जानकारों की मानें तो बुधवार को सुबह 9 बजे के बाद जब बाजार खुलेगा तो कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है. उसका सबसे बड़ा कारण इंडियन बास्केट में तेजी है.
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भले ही अभी 100 डॉलर प्रति बैरल के लेवल को पार नहीं की, लेकिन इंडियन बास्केट आंकड़ा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार दिखाई दे रहा है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार इंडियन बास्केट के दाम 101 डॉलर प्रति बैरल के करीब देखने को मिल रहे हैं. जिसमें जुलाई के बाद करीब 23 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है. जुलाई के महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल थी. वैसे अप्रैल के 114.48 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले अभी भी कच्चे तेल की कीमतें कम हैं.