मंगलवार, 25 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
Vastu Tips: घर के Main Entrance पर नंदी की स्थापना से दूर होगी Negative Energy, बरसती है महादेव की कृपा​ | शक्कर के बाद अब गुड़ ने बिगाड़ा बजट, त्योहारों से पहले आसमान छू रही कीमतें​ | Mercury Transit 2026: कन्या राशि में बुध का गोचर, Bhadra Yoga से इन 3 राशियों की बदलेगी किस्मत​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

हिजाब इस्लामिक आस्था का जरूरी हिस्सा नहीं… इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देगा AIMPLB​

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का कोई जरूरी हिस्सा है, जिसके बिना किसी की धार्मिक पहचान खो जाएगी. वहीं, अब […]

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का कोई जरूरी हिस्सा है, जिसके बिना किसी की धार्मिक पहचान खो जाएगी. वहीं, अब इस पूरे मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डएआईएमपीएलबी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है.

याचिकाकर्ता प्रयागराज के अतरसुइया स्थित एक निजी स्कूल की नाबालिग छात्रा है और इसी विद्यालय में वह 11 वीं कक्षा में नामांकन ले रही है. टैगोर पब्लिक स्कूल की यह नाबालिग छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिये यह याचिका दायर की थी. न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की दो सदस्यीय पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकी कि सिर ढकना इस्लाम की ऐसी आवश्यक धार्मिक प्रथा है, जिसके पालन के बिना उसकी आस्था खतरे में पड़ जाएगी.

पीठ ने कहा कि हमने याचिकाकर्ता से जुड़ी विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरें देखी हैं और केवल उसे छोड़कर किसी भी छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है. यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है.

जानें क्या बोले मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली

एआईएमपीएलबी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने मंगलवार को लखनऊ में कहा कि हमें मामले की जानकारी है. कहीं न कहीं कुछ भ्रम है, क्योंकि हिजाब हमेशा से इस्लाम का अहम हिस्सा रहा है. हम निश्चित रूप से अदालत जाएंगे और अपना पक्ष रखेंगे. मौलाना ने कहा कि संविधान व्यक्ति को अपने धर्म के मूल और अभिन्न सिद्धांतों का पालन करने की अनुमति देता है.

स्कूलों के तय ड्रेस कोड का पालन जरूरी

उन्होंने कहा कि जहां तक इस मामले का सवाल है, हमें लगता है कि निश्चित रूप से कुछ भ्रम है. हिजाब का उल्लेख कुरान और हदीस दोनों में है और दुनिया भर में मुस्लिम महिलाएं इसे पहनती हैं. हालांकि रशीद ने कहा कि छात्राओं को स्कूलों के तय ड्रेस कोड का पालन करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड मानने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर कोई छात्रा उसी समय अपने धार्मिक कर्तव्यों का भी पालन करना चाहती है तो क्या होगा। हमें लगता है कि अदालत के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY