वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ सिविल न्यूक्लियर डील पर नई शर्त रख दी है। ट्रंप ने कहा कि इस डील को सफल बनाने के लिए सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होना होगा। यानी सऊदी को इजरायल को मान्यता देते हुए उससे सामान्य संबंध स्थापित करने होंगे।

ट्रंप का बयान सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने मुश्किल स्थिति पैदा करता है। सऊदी सरकार ने कई दफा साफतौर पर कहा है कि इजरायल को तभी मान्यता दी जाएगी, जब वह टूस्टेट सॉल्युशन के तहत फिलिस्तीन को एक आजाद देश के तौर पर मान्यता देगा। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि क्या MBS इजरायल को मान्यता देने पर राजी हो सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि सऊदी के साथ सिविल न्यूक्लियर डील सिर्फ गैरसैन्य इस्तेमाल के लिए है। इसमें मटीरियल का एनरिचमेंट नहीं होगा। हालांकि इसकी सफलता यह पूरी तरह से सऊदी अरब के अब्राहम एकॉर्ड्स में शामिल होने का फैसला लेने पर निर्भर करेगी।
इस समझौते के तहत मटीरियल का कोई एनरिचमेंट नहीं होगा। यह समझौता सिर्फ गैरसैन्य इस्तेमाल से जुड़ा है। समझौता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि सऊदी अरब बहुत सम्मानित और सफल अब्राहम समझौते में शामिल हो जाए।
सऊदीअमेरिका समझौता
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सिविल न्यूक्लियर फैसिलिटीज का विरोध नहीं करता है। सऊदी के साथ प्रस्तावित समझौता भी केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा। यह वही मॉडल है, जैसा कि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य कई देशों के पास पहले से मौजूद है।
समझौते के तहत सऊदी अरब को अमेरिकी तकनीक की मदद से परमाणु रिएक्टर बनाने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलेगी। हालांकि इस समझौते में संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षण की शर्त शामिल नहीं है, जिसे अमेरिका कई मामलों में जरूरी मानता रहा है।
अब्राहम अकॉर्ड क्या है
अब्राहम अकॉर्ड साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल हुआ उनका एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल को पश्चिम एशिया में मान्यता दिलाने की कोशिश है। इसका मुख्य उद्देश्य इजरायल के साथ अरब देशों के संबंधों को सामान्य बनाना है।
अब्राहम समझौते में UAE और बहरीन सबसे पहले शामिल हुए थे। ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद इस अकॉर्ड के विस्तार की कोशिशें की हैं। वह खासतौर से पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे मुस्लिम जगत के ताकतवर देशों को अब्राहम अकॉर्ड में लाना चाहते हैं। हालांकि अब तक उनको इसमें बहुत सफलता नहीं मिल सकी है।
ऐसी रिपोर्ट सामने आई थीं, जो बताती थीं कि 2023 में गाजा में लड़ाई से पहले सऊदी में अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने पर विचार हो रहा था। बीते तीन साल से इजरायल के गाजा में भीषण हमलों और हजारों लोगों की हत्या ने मुस्लिम जगत में भारी गुस्सा पैदा किया है। इससे चीजें पूरी तरह से बदल गई हैं। ऐसे में सऊदी सरकार के लिए इजरायल को मान्यता देना बेहद मुश्किल होगा।