प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है. यही वजह है कि कई मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है, जब कैंसर आगे बढ़ चुका होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पेशाब से जुड़ी समस्याओं को केवल बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

पीएसआरआई हॉस्पिटल, साकेत के सीनियर कंसल्टेंट, हेमेटोलॉजिस्ट एवं ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय बताते हैं कि यह एक आम गलतफहमी है कि प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत हमेशा लक्षणों के साथ होती है. उनके अनुसार, शुरुआती चरण में कई मरीज पूरी तरह सामान्य महसूस करते हैं और उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती.
इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समयसमय पर स्वास्थ्य जांच कराना अधिक जरूरी है, खासकर उन पुरुषों के लिए जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है.
प्रोस्टेट कैंसर के 5 संकेत, जिन्हें नजरअंदाज न करें
बारबार यूरिन आना, खासकर रात में
यदि रात में कई बार उठकर पेशाब जाना पड़े या अचानक पेशाब की आवृत्ति बढ़ जाए, तो यह प्रोस्टेट से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है.
यूरिन करने में परेशानी
पेशाब शुरू करने में कठिनाई, धार का कमजोर होना, जोर लगाना पड़ना या यह महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ है, ऐसे लक्षण डॉक्टर से जांच कराने की मांग करते हैं.
यूरिन या स्पर्म में खून आना
यदि एक बार भी पेशाब या वीर्य में खून दिखाई दे, तो इसे सामान्य मानने की भूल न करें. यह कई गंभीर बीमारियों, जिनमें प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है, का संकेत हो सकता है.
कमर, कूल्हों या पेल्विस में लगातार दर्द
लगातार रहने वाला कमर, कूल्हे या श्रोणि क्षेत्र का दर्द, खासकर जब इसके साथ पेशाब संबंधी दिक्कतें भी हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है.
बिना कारण वजन घटना और लगातार थकान
यदि बिना डाइटिंग या किसी अन्य वजह के वजन कम हो रहा हो या लंबे समय तक थकान बनी रहे, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. जिन लोगों के परिवार में पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, उनमें यह खतरा और अधिक होता है. ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से प्रोस्टेट स्क्रीनिंग के बारे में सलाह लेनी चाहिए, भले ही उन्हें कोई लक्षण न हों.
डॉ. अमित उपाध्याय कहते हैं कि इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से प्रोस्टेट कैंसर है. अधिकांश मामलों में इनकी वजह दूसरी सामान्य समस्याएं भी हो सकती हैं. लेकिन बिना जांच के वास्तविक कारण का पता नहीं चल सकता. अगर बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इसका इलाज अधिक प्रभावी और सफल होने की संभावना रहती है.
इसलिए पुरुषों को अपने शरीर में होने वाले लगातार बदलावों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है.