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म्यूल अकाउंट से ऑनलाइन शॉपिंग तक… जामताड़ा गैंग का ‘डिजिटल चक्रव्यूह’, कैसे ऑपरेशन साइबर वज्र ने किया ध्वस्त?​

Moradabad Cyber Crime: डिजिटल ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर मुरादाबाद पुलिस ने बड़ी चोट करते हुए एक ऐसे साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर में ऑनलाइन ठगी का जाल बिछा रखा था. मुरादाबाद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत झारखंड के जामताड़ा से जुड़े तीन शातिर […]

Moradabad Cyber Crime: डिजिटल ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर मुरादाबाद पुलिस ने बड़ी चोट करते हुए एक ऐसे साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर में ऑनलाइन ठगी का जाल बिछा रखा था. मुरादाबाद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत झारखंड के जामताड़ा से जुड़े तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि यह गिरोह सिर्फ लोगों को ठगने तक सीमित नहीं था, बल्कि ‘म्यूल अकाउंट’ और ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ऐसा डिजिटल चक्रव्यूह तैयार कर चुका था, जिसने जांच एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गुड्डू, रफीक और करीम के रूप में हुई है. तीनों मूल रूप से झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले हैं और मुरादाबाद में किराये का कमरा लेकर देशभर में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे. पुलिस ने इनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 4 पेन ड्राइव, 23 सक्रिय सिम कार्ड, एयरटेल और जियो के नए सिम, 10 एटीएम कार्ड, फर्जी दस्तावेज और नकदी बरामद की है. पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था.

म्यूल अकाउंट बना सबसे बड़ा हथियार

जांच में सामने आया कि आरोपी सीधे अपने बैंक खातों में ठगी की रकम नहीं मंगाते थे. इसके बजाय वे गरीब और जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में करते थे. इन खातों के जरिए पैसा कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था. यही वजह है कि कई मामलों में जांच एजेंसियों को ट्रांजैक्शन ट्रेल पकड़ने में लंबा समय लग जाता था.

ऑनलाइन शॉपिंग से कैश में बदलते थे ठगी के पैसे

गिरोह की कार्यशैली का सबसे चौंकाने वाला पहलू ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल था. ठगी से हासिल रकम से आरोपी महंगे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य उत्पाद ऑनलाइन ऑर्डर करते थे. डिलीवरी मिलने के बाद इन सामानों को स्थानीय बाजारों में आधे या पौने दाम पर बेचकर नकदी हासिल कर लेते थे. इस तरीके से न केवल पैसों का स्रोत छिप जाता था, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के जरिए जांच करना भी बेहद कठिन हो जाता था.

‘प्रतिबिंब’ पोर्टल से मिली बड़ी सफलता

पुलिस के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तकनीकी निगरानी और केंद्र सरकार के ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल की मदद से संभव हो सका. डिजिटल गतिविधियों की निगरानी के दौरान संदिग्ध इनपुट मिलने पर थाना कटघर और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को दबोच लिया. एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में गिरोह का संबंध 20 से अधिक साइबर ठगी के मामलों से सामने आया है और लाखों रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है.

पुलिस अब इस सिंडिकेट के स्थानीय मददगारों, किराये पर कमरा उपलब्ध कराने वालों और पूरे नेटवर्क के बैकवर्डफॉरवर्ड लिंक की जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ ने न केवल एक बड़े साइबर नेटवर्क की कमर तोड़ी है, बल्कि डिजिटल अपराध के खिलाफ मुरादाबाद पुलिस की तकनीकी क्षमता और सतर्कता का भी मजबूत संदेश दिया है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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