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सरकार ने बदला विंडफॉल टैक्स का गणित: डीजल-ATF एक्सपोर्ट पर बढ़ा टैक्स, पेट्रोल पर घटाया​

बुधवार को भारत सरकार ने विंडफॉल टैक्स की अपनी फ्रेश 15 दिनों की समीक्षा में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स में कटौती की. यह बदलाव 16 जुलाई यानी गुरुवार से लागू हो गया है. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, […]

बुधवार को भारत सरकार ने विंडफॉल टैक्स की अपनी फ्रेश 15 दिनों की समीक्षा में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स में कटौती की. यह बदलाव 16 जुलाई यानी गुरुवार से लागू हो गया है. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 4 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है.

डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि ATF के एक्सपोर्ट पर टैक्स 7.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है. विंडफॉल टैक्स में यह बदलाव ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उतारचढ़ाव के बीच किया गया है.

कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव

बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 फीसदी बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. ऐसा तब हुआ जब अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं. यह एक अहम रास्ता है जिससे संघर्ष से पहले दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल आताजाता था.

कीमतों में बढ़ोतरी को फिर से बढ़े जियो पॉलिटिकज टेंशन और तेल टैंकरों पर हमलों से भी समर्थन मिला, हालांकि महंगाई और ग्लोबल डिमांड में कमी की चिंताओं ने और बढ़ोतरी को सीमित कर दिया. रूस से कम एक्सपोर्ट सहित सप्लाई में रुकावटों के कारण डीजल रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने से भी फ्यूल मार्केट दबाव में रहा.

केंद्र ने जब वापस लिया था ये फैसला

केंद्र ने 11 जून को औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत ग्राहकों के लिए रिटेल फ्यूल स्टेशनों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी थी और उन्हें थोक खरीद चैनलों के ज़रिए सप्लाई लेने का निर्देश दिया था. यह अस्थायी आदेश फ्यूल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और डायवर्जन को रोकने और रिटेल ग्राहकों के लिए बिना रुकावट सप्लाई बनाए रखने के लिए जारी किया गया था. जिसे बाद में 29 के जून के आदेश में वापस ले लिया गया था और 1 जुलाई को लागू किया गया था.

सरकार ने ग्लोबल पेट्रोलियम सप्लाई चेन और शिपिंग लॉजिस्टिक्स को प्रभावित करने वाली मौजूदा भूराजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि रुकावटों से सप्लाई में असंतुलन का खतरा बढ़ गया है. अधिकारियों ने रिटेल आउटलेट्स पर डीजल और पेट्रोल की असामान्य रूप से अधिक बिक्री भी देखी थी, क्योंकि थोक ग्राहकों ने कीमतों में बढ़ते अंतर के कारण अपनी खरीद को समर्पित सप्लाई चैनलों से हटाकर रिटेल पंपों की ओर मोड़ दिया था.

90 दिनों तक लागू थी पाबंदियां

उस समय, दिल्ली में रिटेल डीजल की कीमत 95.20 रुपए प्रति लीटर थी, जबकि थोक खरीदार 134.50 रुपए प्रति लीटर का भुगतान कर रहे थे. यह अंतर तब पैदा हुआ जब सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने आम ग्राहकों को पश्चिम एशिया संघर्ष से होने वाली अधिक लागत से बचाने के लिए रिटेल फ्यूल की कीमतों को नियंत्रित रखा, जबकि थोक ग्राहक मार्केट से जुड़ी दरों का भुगतान करते रहे.

इस आदेश के तहत, रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री सिर्फ गाड़ियों के फ्यूल टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइज़ेशन से मंजूर कंटेनर्स तक ही सीमित कर दी गई है. साथ ही, हर ग्राहक या गाड़ी के लिए रोजाना 200 लीटर डीज़ल खरीदने की सीमा तय की गई है. ये पाबंदियां 90 दिनों तक लागू रह सकती हैं और सरकार के नए आदेश से इन्हें बढ़ाया भी जा सकता है. नियमों का उल्लंघन करने पर ‘जरूरी चीज़ों से जुड़े कानून’ के तहत सजा हो सकती है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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