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इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ डायबिटीज नहीं, बढ़ा सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का खतरा; जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ डायबिटीज नहीं, बढ़ा सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का खतरा; जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

जब बात ब्लड शुगर या डायबिटीज की आती है, तो हम अक्सर मीठे से दूरी बना लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज से भी पहले शरीर में एक खामोश खतरा पनपता है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) कहते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल डायबिटीज का शुरुआती संकेत नहीं है, बल्कि यह शरीर में एक टाइम बम की तरह काम करता है। अगर समय रहते इसे न पहचाना जाए, तो यह दिल की बीमारियों से लेकर फैटी लिवर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ डायबिटीज नहीं, बढ़ा सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का खतरा; जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स
इंसुलिन रेजिस्टेंस सिर्फ डायबिटीज नहीं, बढ़ा सकता है इन 6 गंभीर बीमारियों का खतरा; जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital मुंबई में एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख Dr Dheeraj Kapoor ने बताया इंसुलिन रेजिस्टेंस और दूसरी बीमारियों का संबंध अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन कई अध्ययनों से संकेत मिलता है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस माइग्रेन का एक योगदानकारी कारक हो सकता है। ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी माइग्रेन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जिससे सिरदर्द की गंभीरता और आवृत्ति बढ़ सकती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं। इसे आमतौर पर डायबिटीज और मेटाबॉलिक विकारों से जोड़ा जाता है, लेकिन कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुका है कि इसका संबंध माइग्रेन से भी हो सकता है।

शोध यह भी दर्शाते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों में माइग्रेन के दौरे अधिक बार और अधिक गंभीर हो सकते हैं। जिन लोगों के शरीर में फास्टिंग इंसुलिन का स्तर अधिक होता है, उनमें माइग्रेन के एपिसोड भी अधिक देखे गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि माइग्रेन के कंट्रोल में इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाना जरूरी हो सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और इसका हमारी ओवर ऑल हेल्थ पर कैसा असर होता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस से कौन कौन सी बीमारियों का होता है खतरा

डायबिटीज

डॉ. धीरज कपूर के अनुसार, माइग्रेन के संभावित संबंध के अलावा इंसुलिन रेजिस्टेंस कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है। इंसुलिन रेजिस्टेंस टाइप-2 डायबिटीज की प्रमुख पहचान है। जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं और पैंक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तब ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

हाई ब्लड प्रेशर और दिल के रोगों का बढ़ता है खतरा

इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड्स और HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल से जुड़ा है, जिससे दिल के रोगों और स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।

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मोटापा भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह

जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में शुगर और अतिरिक्त ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता, जिससे यह धीरे-धीरे चर्बी के रूप में जमा होने लगती है, खासकर पेट के आसपास। यही कारण है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों में वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा अधिक हो सकता है।

फैटी लिवर डिजीज का बढ़ता है खतरा

जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो लिवर में सूजन आ सकती है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है।

पीसीओएस (PCOS)

इंसुलिन रेजिस्टेंस पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है, जिससे मासिक धर्म चक्र और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

क्रोनिक इंफ्लेमेशन

लगातार बना रहने वाला इंसुलिन रेजिस्टेंस शरीर में हल्की लेकिन लगातार सूजन पैदा कर सकता है, जो कई क्रॉनिक बीमारियों की जड़ माना जाता है।

 इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?  

डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर Kanikka Malhotra कहती हैं डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके शुरुआती चरण में ही इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल किया जाए तो इससे ओवर ऑल हेल्थ में सुधार हो सकता है, इससे जुड़े जोखिम को कम किया जा सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करेगी रेगुलर एक्सरसाइज 

कनिका मल्होत्रा के अनुसार, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार लाकर इसके साइड इफेक्ट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित एक्सरसाइज जैसे एरोबिक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद करती हैं।

संतुलित आहार का करें सेवन

इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने के लिए रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, लो-फैट प्रोटीन और हेल्दी फैट्स शामिल करें। ऐसे खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करते हैं और शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया को बेहतर बना सकते हैं।

वजन कंट्रोल करें

अगर आप चाहते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस कंट्रोल रहे तो आप अपना वजन कंट्रोल करें।शरीर के वजन में सिर्फ 5–10% की कमी भी इंसुलिन सेंसिटिविटी में बड़ा सुधार ला सकती है। वजन कंट्रोल करने के लिए डाइट में सुधार करें और बॉडी को एक्टिव रखें।

नींद पूरी लें

अच्छी और पर्याप्त नींद इंसुलिन के स्तर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद करती है। इन उपायों को अपनाकर और हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लेकर आप इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावी ढंग से कंट्रोल कर सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करके माइग्रेन समेत कई हेल्थ प्रॉब्लम को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी नई डाइट, व्यायाम या स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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