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Weight Loss: चाय के साथ बिस्कुट खाने की आदत सेहत के लिए है खतरा? एक्सपर्ट से जानिए वो 2 हेल्दी चीजें जो वजन और पाचन को रख सकती हैं दुरुस्त

Weight Loss: चाय के साथ बिस्कुट खाने की आदत सेहत के लिए है खतरा? एक्सपर्ट से जानिए वो 2 हेल्दी चीजें जो वजन और पाचन को रख सकती हैं दुरुस्त

Healthy Alternatives to Tea and Biscuits: भारत में सुबह या शाम की चाय के साथ बिस्कुट खाना एक ऐसा रूटीन है, जो लगभग हर घर में देखने को मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैदे और चीनी से बने ये बिस्कुट आपके वजन को बढ़ाने और पाचन तंत्र को धीमा करने का बड़ा कारण बन सकते हैं? अगर आप भी चाय के शौकीन हैं और अपनी सेहत से समझौता नहीं करना चाहते, तो चाय के साथ बिस्कुट खाने से परहेज करें। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिस्कुट की जगह चाय के साथ हल्के-फुल्के भुने हुए मखाने और मुरमुरे (Puffed Rice) का सेवन एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प है। 

Weight Loss: चाय के साथ बिस्कुट खाने की आदत सेहत के लिए है खतरा? एक्सपर्ट से जानिए वो 2 हेल्दी चीजें जो वजन और पाचन को रख सकती हैं दुरुस्त
Weight Loss: चाय के साथ बिस्कुट खाने की आदत सेहत के लिए है खतरा? एक्सपर्ट से जानिए वो 2 हेल्दी चीजें जो वजन और पाचन को रख सकती हैं दुरुस्त

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक अधिकांश बिस्कुट और कुकीज़ में फैट की मात्रा काफी अधिक होती है। खासकर सॉफ्ट कुकीज़ में फैट ज्यादा डाला जाता है, जिससे उनकी कैलोरी भी बढ़ जाती है। होममेड कुकीज़ में लगभग 30% तक फैट हो सकता है, जबकि क्रीम और चॉकलेट वाले कई बिस्किटों में भी वसा की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा फैट और कैलोरी वाले बिस्किट वजन बढ़ाने और दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए नाश्ते में या चाय के साथ बिस्कुट खाने से परहेज करना चाहिए। आइए रिसर्च से जानते हैं कि चाय के साथ बिस्कुट खाने से सेहत को कैसे नुकसान पहुंचते हैं और मखाना और मुरमुरा कैसे सेहत के लिए उपयोगी हैं।

बिस्कुट कैसे सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं?

किसी भी फूड की स्वास्थ्यवर्धकता केवल फैट से नहीं, बल्कि उसकी कुल पोषण प्रोफाइल, चीनी, फाइबर और सेवन की मात्रा पर निर्भर करती है जो बिस्कुट में बिल्कुल भी मौजूद नहीं है। World Health Organization (WHO) की वैश्विक न्यूट्रिशन रिपोर्ट और The American Journal of Clinical Nutrition के एक व्यापक अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि कमर्शियल बिस्कुट और कुकीज़ को लंबे समय तक सुरक्षित और क्रिस्पी रखने के लिए ‘पार्शियली हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑयल यानी ट्रांस फैट का इस्तेमाल किया जाता है।

रिसर्च साबित करती है कि चाय के गर्म तापमान के साथ जब मैदा, रिफाइंड शुगर और ट्रांस फैट पेट में जाते हैं, तो ये सीधे तौर पर धमनियों में गंदा कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को बढ़ाते हैं। इनमें फाइबर शून्य होने के कारण ये आंतों की गति को धीमा कर देता हैं, जो क्रोनिक कब्ज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का मुख्य कारण बनता है।

मुरमुरे: वजन घटाने और पाचन के लिए हल्का विकल्प

मुरमुरे (Puffed Rice) एक हल्का और कम कैलोरी वाला स्नैक माना जाता है। इसमें वसा बहुत कम होती है, इसलिए यह तले हुए स्नैक्स और बिस्कुट की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है। मुरमुरे पेट को अधिक भारी महसूस नहीं होने देते और इनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। यदि इसमें प्याज, टमाटर, खीरा, हरी धनिया और नींबू मिलाकर खाया जाए तो इसकी पोषण गुणवत्ता और बढ़ जाती है। वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा स्नैक हो सकता है क्योंकि इससे कम कैलोरी में पेट भरने में मदद मिलती है। साथ ही यह पाचन तंत्र पर  हल्का रखता है।

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Journal of Agriculture and Food Chemistry और MDPI Nutrients Journal में प्रकाशित मखाने (Euryale ferox) पर की गई एक क्लिनिकल स्टडी के अनुसार वैज्ञानिकों ने पाया कि मखाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बेहद कम होता है। इसमें मौजूद हाई-प्रोटीन और फाइबर के कारण जब हम इसे खाते हैं, तो यह शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ‘घ्रेलिन’ के स्तर को दबा देता है और पेट भरे होने का अहसास कराने वाले हार्मोन ‘लेप्टिन’ को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, मखाने में ‘कैंप फेरोल’ (Kaempferol) नामक एक प्राकृतिक फ्लेवोनोइड होता है, जो एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर है और दिल की नसों की सूजन को कम करता है।

मखाना: पोषण और वजन कंट्रोल करने का बेहतर साथी

मखाना (Fox Nuts) प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। फाइबर की मौजूदगी के कारण इसे खाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। यही कारण है कि वजन घटाने वाले डाइट प्लान में मखाने को अक्सर शामिल किया जाता है। भुने हुए मखाने कम तेल में तैयार किए जा सकते हैं, जिससे अतिरिक्त कैलोरी से बचाव होता है। यह पाचन को सहारा देने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक खनिज भी प्रदान करता है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में मखाने का सेवन एक संतुलित और हेल्दी स्नैक विकल्प हो सकता है।

International Journal of Food Sciences and Nutrition की एक रिपोर्ट के मुताबिक पोषण वैज्ञानिकों के अनुसार, मुरमुरे की कैलोरी डेंसिटी बहुत कम होती है। इसका मतलब है कि आप बड़ी कटोरी भरकर भी मुरमुरे खाएंगे तो शरीर को बहुत कम कैलोरी मिलेंगी, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। रिसर्च के अनुसार, जब मुरमुरे में कच्ची सब्जियां जैसे प्याज, टमाटर, खीरा और नींबू का रस मिलाया जाता है, तो यह एक ‘रेसिस्टेंट स्टार्च’ की तरह काम करता है, जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) को पोषण देता है और पाचन क्रिया को रॉकेट स्पीड देता है।

इन्हें तैयार करने और खाने का सही तरीका

  • मखाने को डीप-फ्राई करने के बजाय कड़ाही में सूखा (Dry Roast) भूनें या सिर्फ आधा छोटा चम्मच देसी घी और हल्की सी हल्दी-सेंधा नमक का उपयोग करें। देसी घी में मौजूद गुड फैट्स मखाने के पोषक तत्वों को सोखने में मदद करते हैं।
  • मुरमुरे को सादा खाने के बजाय उसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया और नींबू का रस मिलाएं। नींबू का विटामिन-सी मुरमुरे के आयरन को सोखने में मदद करेगा। इसमें नमकीन या सेव मिलाने से बचें, क्योंकि उनमें फिर से मैदा और पाम ऑयल होता है।

सेहतमंद हैं, लेकिन पोर्शन कंट्रोल है जरूरी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक मखाना और मुरमुरे भले ही वजन कंट्रोल करते हैं, लेकिन इनका सीमित सेवन ही करना चाहिए। चाय के साथ एक छोटा कप (लगभग 20-30 ग्राम) भुना हुआ मखाना या एक कटोरी मुरमुरे की भेल पर्याप्त है। याद रखें कि पैकेटबंद फ्लेवर्ड मखाने जैसे मार्केट में मिलने वाले चीज या पेरी-पेरी मखाने खाने से बचें, क्योंकि उनमें बिस्कुट की तरह ही प्रिजर्वेटिव्स और अत्यधिक नमक होता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और पोषण संबंधी जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। लेख में दिए गए सुझाव हेल्थ एक्सपर्ट्स की सामान्य राय पर आधारित हैं। अगर आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या किसी गंभीर पाचन संबंधी समस्या से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से परामर्श जरूर लें। 

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