खबर इंडिया की। बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। यहां एक युवती ने अपने प्रेमी के साथ रहने का फैसला किया और कोर्ट में अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद आहत पिता ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है।

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जानकारी के मुताबिक, युवती की मुलाकात करीब एक साल पहले कोचिंग के दौरान एक युवक से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई। बताया जा रहा है कि दोनों के घरों के बीच करीब तीन किलोमीटर की दूरी है और लंबे समय से दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे।
12 मई को युवती कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और कुछ दिनों बाद युवती को बरामद कर लिया।
इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में बयान के दौरान युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी मर्जी से युवक के साथ रहना चाहती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने अपने माता-पिता को पहचानने से भी इनकार कर दिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे उसकी इच्छा के अनुसार युवक के साथ रहने की अनुमति दे दी गई।
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यहीं से कहानी ने भावनात्मक मोड़ ले लिया। बेटी के इस फैसले से आहत परिवार ने उसे अपने जीवन से अलग मान लिया। पिता ने गांव में बेटी का प्रतीकात्मक पुतला बनवाया। इसके बाद पूरे गांव में उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई और श्मशान घाट में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार भी किया गया।
बताया जा रहा है कि इस दौरान परिवार के सदस्य काफी भावुक नजर आए। पिता, दादा और अन्य रिश्तेदारों की आंखों में आंसू थे। परिवार का कहना है कि जिस बेटी को उन्होंने प्यार और भरोसे के साथ पाला, उसी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें ठुकरा दिया। इसी पीड़ा में उन्होंने यह प्रतीकात्मक कदम उठाया।
वहीं युवती की मां ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी बेटी ने परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि दोनों वयस्क हैं और कानून के अनुसार किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ लोग परिवार की भावनाओं को समझने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई लोग युवती के कानूनी अधिकारों का समर्थन भी कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रेम, परिवार, सामाजिक मान्यताओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है।











