वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर, डिमेंशिया और भूलने की बीमारी के खिलाफ जंग में एक ऐसी ऐतिहासिक खोज की है जो इंसानी दिमाग को हमेशा जवान बनाए रख सकती है। रिसर्चर्स ने एक ऐसे ‘एंटी-एजिंग प्रोटीन की पहचान की है, जो बढ़ती उम्र में भी मस्तिष्क की कोशिकाओं (Brain Cells) को बूढ़ा होने और सिकुड़ने से रोकता है। बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त का कमजोर होना और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ना एक आम समस्या है, लेकिन नई खोज भविष्य में दिमागी बुढ़ापे को धीमा करने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने मेनिन प्रोटीन की पहचान की है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की क्षमता रखता है। ये प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं को हमेशा हेल्दी रखेगा और ब्रेन हेल्थ में सुधार करेगा।

PLOS Biology जर्नल में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, दिमाग में मौजूद Menin नामक प्रोटीन का स्तर कम होने पर सूजन (Inflammation), याददाश्त में कमी और उम्र से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ने लगती हैं। रिसर्च में इस प्रोटीन को दोबारा बढ़ाने से उम्र बढ़ने के कई संकेतों को रिवर्स होते हुए देखा गया है। यह अध्ययन चीन की Xiamen University के वैज्ञानिक लिजे लेंग और उनकी टीम ने किया। शोधकर्ताओं का कहना है कि Menin प्रोटीन दिमाग में सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। चूहों पर किए गए प्रयोगों में, प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने से उम्र बढ़ने के कई लक्षण रिवर्स हो गए, जबकि एक साधारण अमीनो एसिड सप्लीमेंट ने संज्ञानात्मक कार्य में सुधार किया।
हाइपोथैलेमस में घटता है Menin का स्तर
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जैसे-जैसे प्रयोगशाला के चूहे बूढ़े होते गए, उनके दिमाग के हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) में Menin का स्तर तेजी से घटता गया। हाइपोथैलेमस दिमाग का वह हिस्सा है जो शरीर के तापमान, हार्मोन, नींद, तनाव और मेटाबॉलिज्म जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। खासतौर पर Ventromedial Hypothalamus (VMH) नामक क्षेत्र के न्यूरॉन्स में Menin की कमी देखी गई, जबकि आसपास की अन्य सहायक कोशिकाओं में इसका स्तर लगभग स्थिर रहा।
Menin की कमी से बढ़ीं उम्र से जुड़ी समस्याएं
वैज्ञानिकों ने ऐसे चूहे तैयार किए जिनमें Menin की गतिविधि को जानबूझकर कम किया गया। परिणाम चौंकाने वाले थे। कम उम्र के इन चूहों में दिमागी सूजन बढ़ गई, त्वचा पतली होने लगी, हड्डियों का घनत्व कम हुआ, संतुलन बिगड़ा, याददाश्त कमजोर हुई और उनकी जीवन अवधि भी घट गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि Menin दिमाग के भीतर एक नेचुरल एंटी-एजिंग फैक्टर की तरह काम करता है, जो शरीर को उम्र बढ़ने के दुष्प्रभावों से बचाने में मदद करता है।
D-Serine से भी जुड़ा है कनेक्शन
अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण खोज D-Serine नामक अमीनो एसिड से जुड़ी रही। D-Serine जो एक अमीनो एसिड है और मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में भी कार्य करता है। डी-सेरीन न्यूरॉन्स के बीच संचार को विनियमित करने में मदद करता है जो सीखने और याददाश्त को मजबूत रखने के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने पाया जब चूहों में मेनिन का स्तर गिरा, तो डी-सेरीन का उत्पादन भी कम हो गया। शोधकर्ताओं ने इस प्रभाव का कारण डी-सेरीन संश्लेषण के लिए आवश्यक एक एंजाइम की कम गतिविधि को बताया, जो स्वयं मेनिन द्वारा विनियमित प्रतीत होता है। आपको बता दें कि डी-सेरीन नेचुरल रूप से सोयाबीन, अंडे, मछली और मेवों सहित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
Khabar Monkey
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और वैज्ञानिकों की खोज पर आधारित तथ्य केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इसे किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार के रूप में न लिया जाए। हमारा उद्देश्य किसी भी दावे की पुष्टि करना नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या, दवा या जीवनशैली में बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।












