शहजाद भट्टी एक ऐसा नाम है जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की बीते कुछ वर्षों से परेशानी बढ़ा रखी है। करीब 45 साल का भट्टी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की कई जांचों के केंद्र में है। एजेंसियों का आरोप है कि खुद को न गैंगस्टर और न ही माफिया बताने वाला यह शख्स अब सीमा पार अपराध और आतंक से जुड़े नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुका है।

शहजाद भट्टी ने कई वर्षों तक खुद को एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कारोबारी और स्वयंभू धर्म का समर्थक बताने वाले शख्स के रूप में पेश किया। “333” ब्रांड के नाम से ऑनलाइन वीडियो पोस्ट कर उसने धार्मिक विवादों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के झगड़ों और भारत-पाकिस्तान संबंधों जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाए।
हालांकि, हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुजरात से नौ लोगों को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन लोगों के संबंध शहजाद भट्टी के नेटवर्क से थे और वे दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर, दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक फेमस होटल और हरियाणा के एक मिलिट्री कैंप पर हमले की साजिश रच रहे थे।
इन गिरफ्तारियों के बाद एक बार फिर शहजाद भट्टी चर्चा में आ गया है, जो खुद को कारोबारी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और पाकिस्तान समर्थक राष्ट्रवादी आवाज के रूप में पेश करता है।
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अपराध जगत से जुड़ने के आरोप
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला शहजाद भट्टी पहली बार 2013 में पाकिस्तान पुलिस की निगाह में आया था, जब उसके खिलाफ चोरी और लूटपाट के मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद भी उसके खिलाफ कई अन्य मामले दर्ज हुए, जिनमें रेप के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि भट्टी इन सभी आरोपों से इनकार करता रहा है।
उसका नाम लाहौर के अपराध जगत के कुछ चर्चित चेहरों खासकर फर्रुख खोखर से भी जोड़ा गया। हालांकि भट्टी का कहना है कि ये केवल व्यक्तिगत दोस्ती थी, कोई संगठित संबंध नहीं। करीब 2015 में भट्टी के संयुक्त अरब अमीरात चले जाने की बात कही जाती है। उसका दावा है कि वह स्क्रैप ट्रेडिंग, कृषि और डेयरी कारोबार से जुड़ा है। फिलहाल उसकी सटीक लोकेशन स्पष्ट नहीं है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तान और खाड़ी देशों के बीच आवाजाही करता रहता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी लोकप्रियता
2018 के बाद पाकिस्तान में टिकटॉक की लोकप्रियता बढ़ने के साथ भट्टी ने भी सोशल मीडिया पर तेजी से पहचान बनाई। उसने धर्म, राष्ट्रवाद और ऑनलाइन विवादों से जुड़े वीडियो पोस्ट कर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाए। उसकी पहचान सोशल मीडिया पर “333” ब्रांड से जुड़ी है, जिसे वह किसी गैंग या संगठन के बजाय अपना व्यक्तिगत प्रतीक बताता है।
भट्टी ने खुद को धार्मिक मुद्दों का पैरोकार बताने की छवि बनाई। वह अक्सर पाकिस्तान में ईशनिंदा और धार्मिक विवादों से जुड़े मामलों पर टिप्पणी करता रहा है। अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर रजब बट के घर के बाहर हुई गोलीबारी की घटना पर भी उसने खुलकर प्रतिक्रिया दी थी।
लॉरेंस बिश्नोई से कथित संबंध
शहजाद भट्टी के पब्लिक लाइफ का सबसे चर्चित पहलू भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से उसकी कथित दोस्ती रही है। भट्टी का दावा है कि यह संबंध तब शुरू हुआ जब उसने सोशल मीडिया पर कथित इस्लाम विरोधी सामग्री के खिलाफ मदद मांगी थी। यह रिश्ता तब ज्यादा चर्चा में आया जब जांच एजेंसियों ने उसका नाम जीशान अख्तर से जोड़ा, जिसे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का सहयोगी माना जाता है और जो महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की अक्टूबर 2024 में हुई हत्या के मामले में आरोपी है।
हालांकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद लॉरेंस बिश्नोई द्वारा पाकिस्तान विरोधी बयान दिए जाने के बाद दोनों के संबंधों में खटास आने की खबरें भी सामने आईं।
भारत में नेटवर्क फैलाने के आरोप
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में भट्टी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा रहा है और भारत में बेरोजगार युवाओं को कट्टरपंथी बनाने व अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। मार्च 2024 में पंजाब के जालंधर में इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर के पास हुए ग्रेनेड हमले के बाद भट्टी पर सुरक्षा एजेंसियों का फोकस और बढ़ गया। एजेंसियों का आरोप है कि इस हमले के पीछे भी भट्टी का हाथ था।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में उसके खिलाफ एक दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज होने की बात कही जाती है। इनमें से कुछ मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी कर रही है। कई मामलों में भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।
महाराष्ट्र एटीएस की जांच
शहजाद भट्टी की जांच करने वाली एजेंसियों में महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड भी शामिल है। 13 मई को महाराष्ट्र एटीएस ने राज्यभर में करीब 40 स्थानों पर छापेमारी की और 53 लोगों से पूछताछ की, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे भट्टी के नेटवर्क से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स के संपर्क में थे।
हालांकि अधिकारियों को कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली और कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, लेकिन एटीएस का कहना है कि इस कार्रवाई से नेटवर्क के ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण मॉडल को समझने में मदद मिली। एटीएस अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क सोशल मीडिया पर ऐसे युवाओं की पहचान करता है जो व्यवस्था या सरकार से नाराजगी जाहिर करते हैं।
एक एटीएस अधिकारी के मुताबिक, ऐसे युवाओं को उनकी समस्याओं का समाधान कराने का भरोसा दिया जाता है और धीरे-धीरे उन्हें छोटे-छोटे काम सौंपे जाते हैं। जब उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट हो जाती है, तब उन्हें अलग समूहों में शामिल कर कानून-व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में की गई कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित सुरक्षा खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोकना था।











