EPFO: आज के समय में हर नौकरीपेशा व्यक्ति अपने सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश का एक ऐसा रास्ता खोजता है, जहां रिटर्न की गारंटी भी हो और पैसा भी तेजी से बढ़े. जब बात सुरक्षित निवेश की आती है, तो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ख्याल सबसे पहले आता है. लेकिन हाल के दिनों में फिक्स्ड इनकम वाले साधनों पर रिटर्न का दायरा काफी सीमित हो गया है. ऐसे में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) नौकरीपेशा वर्ग के लिए एक बड़े तारणहार के रूप में सामने आया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत का शानदार ब्याज मिल रहा है. यह दर न केवल सुरक्षित निवेश का भरोसा देती है, बल्कि कंपाउंडिंग के जादू से आपको 2.24 करोड़ रुपये के एक विशाल टैक्स-फ्री फंड का मालिक भी बना सकती है.

फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले पीएफ बना सबसे सुरक्षित ठिकाना
बाजार में निवेश के तमाम नए विकल्प मौजूद होने के बावजूद, सिक्योर्ड रिटर्न की श्रेणी में ईपीएफ आज भी सबसे मजबूत विकल्प है. बैंक एफडी या अन्य पारंपरिक योजनाओं में ब्याज दरें अक्सर महंगाई दर को मात देने में संघर्ष करती दिखती हैं. वहीं, ईपीएफ पर मिलने वाला 8.25 प्रतिशत का वर्तमान ब्याज निवेश के अन्य सुरक्षित विकल्पों की तुलना में काफी आकर्षक है. यहां जमा पैसा न केवल बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है, बल्कि इस पर मिलने वाली कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) लंबी अवधि में छोटी बचत को एक बड़े फंड में बदल देती है.
30 साल की लंबी पारी से तैयार होगा विशाल कॉर्पस
वेल्थ क्रिएशन का सबसे बड़ा नियम निवेश में निरंतरता है. अगर कोई भी व्यक्ति अपने पीएफ खाते में हर महीने 15,000 रुपये की रकम जमा करता है, तो भविष्य की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. लगातार 30 वर्षों तक 8.25 प्रतिशत के सालाना ब्याज के साथ यह रकम 2.24 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कॉर्पस में तब्दील हो जाती है. इस निवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाली यह पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है. इसका सीधा अर्थ है कि रिटायरमेंट के वक्त आपको अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई पर कोई आयकर नहीं चुकाना होगा.
वीपीएफ के जरिए बढ़ाएं अपनी बचत की रफ्तार
अब सवाल यह उठता है कि अगर किसी कर्मचारी की सैलरी से पीएफ मद में 15,000 रुपये नहीं कट रहे हैं, तो वह इस लक्ष्य को कैसे हासिल करे. इस स्थिति में स्वैच्छिक भविष्य निधि यानी वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) आपके काम आता है. वीपीएफ कर्मचारियों को यह सुविधा देता है कि वे अपने ईपीएफ खाते में 12 प्रतिशत के अनिवार्य योगदान के ऊपर भी अपनी मर्जी से पैसा जमा कर सकें. नियमों के मुताबिक, कोई भी कर्मचारी अपने मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (DA) का पूरे 100 प्रतिशत तक वीपीएफ में निवेश कर सकता है. इस अतिरिक्त जमा राशि पर भी ठीक ईपीएफ के बराबर ही ब्याज मिलता है.
निवेश शुरू करने से पहले इन शर्तों का रखें ध्यान
वीपीएफ के जरिए अपनी बचत को तेज करना एक शानदार वित्तीय कदम है, लेकिन इसके कुछ तकनीकी पहलुओं को समझना भी बेहद जरूरी है. वीपीएफ खाते में कंपनी (एंप्लॉयर) की तरफ से कोई भी अतिरिक्त योगदान नहीं किया जाता है; यह पूरी तरह से कर्मचारी का अपना पैसा होता है. इसके अलावा, एक बार जब आप वीपीएफ में अपना कंट्रीब्यूशन शुरू करवा देते हैं, तो इसे बीच में रोकना या बंद करना आसान नहीं होता है. वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए यह नियम है कि वीपीएफ कंट्रीब्यूशन शुरू होने के बाद इसे कम से कम 5 साल तक अनिवार्य रूप से जारी रखना होता है.
Khabar Monkey
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.





