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उम्र, स्वास्थ्य और मांग के आधार तय होता था दाम…. बरेली में बच्चा चोर गैंग का खुलासा, मास्टरमाइंड अरेस्ट

Bareilly Child-Theft Gang Bust: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मनौना धाम से डेढ़ वर्षीय बच्चा चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. इस मामले के मास्टरमाइंड उत्तम को गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी ने पूछताछ में ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है. आरोपी के बयान से नवजात बच्चों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई है. आरोपी ने बताया कि अस्पताल वालों के साथ मिलकर वह नवजात बच्चों की तस्करी का धंधा चला रहा था, जिसमें डॉक्टर भी शामिल है. पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है.

Khabar Monkey

उम्र, स्वास्थ्य और मांग के आधार तय होता था दाम…. बरेली में बच्चा चोर गैंग का खुलासा, मास्टरमाइंड अरेस्ट
उम्र, स्वास्थ्य और मांग के आधार तय होता था दाम…. बरेली में बच्चा चोर गैंग का खुलासा, मास्टरमाइंड अरेस्ट

दरअसल, एक बच्चे के अपहरण की घटना सामने आने के बाद आईपीएस अंशिका वर्मा ने कई टीमों का गठन किया था. लगातार छानबीन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची. इसी दौरान गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त के धंधे से जुड़ा हुआ था और उसके साथ कई अन्य लोग भी काम कर रहे थे.

गरीब परिवार को बनाते थे निशाना

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि गिरोह गरीब और कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था. कई मामलों में अस्पतालों और नर्सिंग होम से जुड़ी जानकारियां भी हासिल की जाती थीं. इसके बाद नवजात बच्चों को चुराकर या अन्य तरीकों से अपने कब्जे में लेकर उन लोगों तक पहुंचाया जाता था, जो बच्चा गोद लेना चाहते थे या किसी कारणवश बच्चे की तलाश में रहते थे. आरोपी ने यह भी बताया कि पूरे नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय थी.

अलग-अलग काम देखते थे लोग

कोई बच्चे की जानकारी जुटाता था तो कोई खरीदार से संपर्क करता था और कुछ लोग पैसों के लेनदेन का काम संभालते थे. पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों की भी भूमिका हो सकती है. इसी कारण कुछ डॉक्टरों और अन्य संदिग्धों के बारे में भी जांच की जा रही है. जांच में सामने आया है कि नवजात बच्चों का सौदा डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक में किया जाता था.

कैसे तय होती थी बच्चों की कीमत?

बच्चे की उम्र, स्वास्थ्य और मांग के आधार पर कीमत तय होती थी. पुलिस को मिले सुराग बताते हैं कि गिरोह कई जिलों में सक्रिय था और लंबे समय से यह अवैध कारोबार चला रहा था. मास्टरमाइंड के खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है. मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों और संदिग्ध लोगों के संपर्कों की जांच की जा रही है. कई स्थानों पर छापेमारी भी की गई है और कुछ अन्य लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

इस मामले ने पूरे बरेली मंडल में सनसनी फैला दी है. लोगों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. वहीं, IPS अंशिका वर्मा का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है और इस मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.

khabarmonkey@gmail.com

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