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‘युवाओं पर पड़ सकता है गलत असर’, सट्टेबाजी आरोपी वाली ओटीटी सीरीज पर NHRC ने उठाए सवाल

पर दिखाए जाने वाले कंटेंट पर सेंसरशिप की डिमांड अक्सर देखी गई है। अब एक वैब सीरीज के खिलाफ शिकायत करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सवाल उठाए है। इस वैब सीरीज पर अवैध सट्टेबाजी, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा देने के इल्जाम लगाए है। आयोग का कहना है कि इस तरह का कंटेंट युवाओं पर गलत असर डाल सकता है। चलिए बताते है पूरा मामला

‘युवाओं पर पड़ सकता है गलत असर’, सट्टेबाजी आरोपी वाली ओटीटी सीरीज पर NHRC ने उठाए सवाल
‘युवाओं पर पड़ सकता है गलत असर’, सट्टेबाजी आरोपी वाली ओटीटी सीरीज पर NHRC ने उठाए सवाल

जिन फिल्मों या कंटेंट पर अक्सर सिनेमाघरों में रिलीज से पहले सेंसरबोर्ड की कैंची चल जाती है। उन फिल्मों और कंटेंट को ओटीटी पर छूट मिल जाती है। ऐसी कई सीरीज ओटीटी पर मौजूद है जो अपनी खराब भाषा, क्राइम संबंधी कंटेंट और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फेमस है। ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ऐसी ही एक वैब सीरीज के खिलाफ एक नोटिस जारी किया। हालांकि इस सीरीज का नाम न बताते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, मुंबई में मौजूद एफआरआरओ के निदेशक और जबलपुर के एसपी से जवाब मांगे।

एटीआर रिपोर्ट की मांग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक वैब सीरीज के खिलाफ एक नोटिस जारी किया। प्रियंक कानूनगो की बेंच में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा के तहत कार्रवाई करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव, मुंबई में मौजूद एफआरआरओ के निदेशक और जबलपुर के एसपी को नोटिस भेजा और जवाब मांगा। इन सभी अधिकारियों से दो हफ्तें के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। शिकायतकर्ता ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अवैध सट्टेबाजी और आर्थिक अपराधों को ग्लोरिफाई करने के इल्जाम लगाए।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म की गाइडलाइंस में बदलाव की मांग

साथ ही इन्हें रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की। उनका कहना है कि इस तरह के कंटेंट से युवाओं पर गलत असर पड़ सकता है। शिकायत में यह भी कहा गया कि कथित अपराधों से जुड़े लोगों को ऐसे पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर दिखने से रोकने के लिए कदम उठाए जाएं।

शिकायत में यह अपील की गई कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और वैब सीरीज के निर्माताओं इस कंटेंट पर जवाब दें। साथ ही इस बात को भी जांचें कि ‘क्या ऐसे कंटेंट से युवाओं की सोच, मेंटल हेल्थ और समाज पर असर हो रहा है।’ उनका कहना है कि इस तरह के कंटेंट पर रोक लगाने और ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने वालों को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर जाने से रोकने के लिए नियम बनाने चाहिए।

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