Khamenei Statement: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने गुरुवार को देश की संसद को संबोधित करते हुए युद्ध के बाद की परिस्थितियों में आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया. संसद के मौजूदा कार्यकाल के तीसरे वर्ष के मौके पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि अब संसद को देश की आर्थिक स्थिरता और पुनर्निर्माण का मजबूत आधार बनना होगा.

आर्थिक सुधार और महंगाई नियंत्रण पर जोर
अयातुल्ला खामेनेई ने कहा कि संसद सदस्यों को आर्थिक स्थिरता, महंगाई नियंत्रण, नकदी प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने और सातवीं विकास योजना में सुधार को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दूसरे और तीसरे युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण से जुड़े प्रावधानों को भी योजना में शामिल किया जाए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मौजूदा हालात और युद्ध के बाद के दौर में सरकार और अन्य संस्थाओं के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करना जरूरी है.
जनता की समस्याओं को दूर करने का आह्वान
ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा कि संसद सदस्यों को सरकार के साथ मिलकर देश के आधुनिकीकरण, रोजगार बढ़ाने, उत्पादन को मजबूत करने और जनता की आर्थिक समस्याओं को दूर करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए. उन्होंने विज्ञान, उद्योग, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय भ्रष्टाचार और महंगाई पर नियंत्रण को भी जरूरी बताया. खामेनेई ने कहा कि देश से गरीबी और अभाव खत्म करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा.
राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील
खामेनेई ने सभी ईरानियों से एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश की आजादी और गौरव के लिए हर नागरिक को राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मतभेदों को संघर्ष और विभाजन में नहीं बदलना चाहिए, बल्कि सभी को एकजुटता और भाईचारे का संदेश देना चाहिए.
दुश्मनों पर समाज में विभाजन फैलाने का आरोप
ईरान के सर्वोच्च नेता ने आरोप लगाया कि युद्ध, आर्थिक दबाव और राजनीतिक घेराबंदी के बाद दुश्मन देश के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विरोधी ताकतें सैन्य मोर्चे पर मिली हार की भरपाई सामाजिक विभाजन पैदा करके करना चाहती हैं ताकि ईरान को कमजोर किया जा सके.
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कुवैत की ओर दागी गई मिसाइल
इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने दावा किया कि ईरान ने 27 मई की रात कुवैत की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे कुवैती सेना ने सफलतापूर्वक रोक दिया. सेंटकॉम के अनुसार, इससे पहले ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पांच ड्रोन भी भेजे थे, जिन्हें अमेरिकी सेना ने मार गिराया. अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास स्थित नियंत्रण केंद्र से एक और ड्रोन लॉन्च होने से भी रोक दिया.
खाड़ी देशों ने जताई नाराजगी
संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब ने कुवैत में अमेरिकी एयरबेस पर हुए मिसाइल हमले की निंदा की है. इन देशों ने इसे कुवैत की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है. यूएई ने अपने बयान में सीधे तौर पर ईरान का नाम लेते हुए इन हमलों को आतंकी कार्रवाई बताया. वहीं तीनों देशों ने कुवैत के साथ एकजुटता जताते हुए उसकी सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम का समर्थन करने की बात कही.





